यजुर्वेद की सूक्तियाँ

यजुर्वेद की सूक्तियाँ--
1-"त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनम्"
यजुर्वेद --3/60
भावार्थ-हम तीन नेत्र वाले भगवान शिव की आराधना करते हैं जिनकी सुगन्ध समान रूप से हर जगह व्याप्त है।
2-"तनूपा अग्निःपातु दुरितादल द्यात"
यजुर्वेद--4/15
भावा_ईश्वर हमें दुराचरण से बचाए।
3- परिमाग्ने दुश्चरिताद बाधस्व"
यजुर्वेद--4/28
भावार्थ--हे ईश्वर!आप हमें दुष्ट आचरण से बचाएँ
4--"मा भेर्मा संविक्था अउर्ज धतस्व"
यजुर्वेद --6/35 
भावार्थ --मत डर। मत घबरा। धैर्य धारण कर। 
5-"इषे त्वा ऊर्जे त्वा"
यजुर्वेद --1/1
भावार्थ =-जीवन समृद्ध और शक्तिशाली बने। 
6-"मा अघशंसः°
यजुर्वेद-- 1/1
भावार्थ --हे ईश्वर! दुष्ट मेरा अहित न करें। 
7--"वयं राष्ट्रे जागृयाम् पुरोहित:*
यजुर्वेद --9/23
भावार्थ--हम राष्ट्र की उन्नति और जागरूकता के लिए सदैव तत्पर रहें। 

8--"अन्नस्य न‌: देहि"
शुक्ल यजुर्वेद --11/83
हे ईश्वर ! हमें उतम अन्न प्रदान करो।
9-"-प्र-प्र दातारं तारिष"
यजुर्वेद —11/83
भावार्थ -- हे ईश्वर ! अन्न देने वाले दाता की उन्नति और रक्षा करो।
10-"ऊर्जं नः धेहि"
यजुर्वेद --11/83
भावार्थ -- हे ईश्वर! हमें शक्ति प्रदान करें।  
11--"आयुर्यज्ञेन कल्पताम्"
यजुर्वेद--11/84
भावार्थ--हे ईश्वर! हमारी आयु श्रेष्फ बने।
12--प्राणोयज्ञेन कल्पताम्
यजुर्वेद --11/84
भावार्थ --हे ईश्वर!हमारे प्राण बलिष्ठ हों।
13--"चक्षुर्यज्ञेन कल्पताम्"
यजुर्वेद --11/84
भावार्थ --हे ईश्वर ! हमारे  नेत्र पवित्र तथा सत्यदर्शी बनें।
(14)"कर्ण यज्ञेन कल्पताम्"
यजुर्वेद--11/81
भावार्थ--हमारे कान शुभ वचनों को ग्रहण करने वाले

बनें।


  

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