ऋगुवेद-सूक्ति--(26c)
पारसी धर्म में “उपकारहीन कृपण को शोक घेर लेता है” — अवेस्ता प्रमाण (अवेस्ताई मूल पाठ, संदर्भ और हिन्दी भावार्थ सहित) 1. अवेस्ता — Yasna 33.11 𐬀𐬭𐬨𐬀𐬌𐬙𐬌𐬱 𐬯𐬞𐬆𐬥𐬙𐬀 𐬀𐬭𐬌𐬨𐬀𐬌𐬙𐬌𐬱𐬗 भावार्थ — पवित्र भक्ति और दया धर्मात्मा का मार्ग हैं। 2. अवेस्ता — Yasna 43.5 𐬵𐬎𐬨𐬀𐬙𐬀 𐬵𐬏𐬑𐬙𐬀 𐬵𐬎𐬎𐬀𐬭𐬱𐬙𐬀 भावार्थ — शुभ विचार, शुभ वचन और शुभ कर्म धर्म का आधार हैं। उपकार और दान “शुभ कर्म” में माने गए हैं। 3. अवेस्ता — Yasna 49.5 𐬀𐬴𐬎𐬭𐬀𐬌 𐬨𐬀𐬰𐬛𐬀𐬌 𐬙𐬭𐬀𐬌𐬙𐬆 भावार्थ — अहुरा मज़्दा धर्मी और उपकारी जनों की रक्षा करते हैं। 4. Vendidad 3.31 𐬀𐬱𐬀𐬊𐬥𐬀𐬨 𐬭𐬀𐬌𐬙𐬌𐬱 𐬠𐬭𐬀𐬎𐬥𐬀 भावार्थ — धर्मी मनुष्य दूसरों के हित में कार्य करता है। 5. Yasht 10.73 𐬨𐬌𐬚𐬭𐬀 𐬞𐬀𐬌𐬙𐬌 𐬯𐬞𐬆𐬥𐬙𐬀 भावार्थ — मिथ्र (दैवी शक्ति) उदार और सत्यनिष्ठ लोगों का साथ देता है। 6. अवेस्ता — Yasna 60.5 𐬯𐬞𐬆𐬥𐬙𐬀 𐬨𐬀𐬌𐬥𐬌𐬎 𐬯𐬀𐬊𐬱𐬌𐬀𐬥𐬙𐬆 भावार्थ — पवित्र और दयालु मनुष्य कल्याण प्राप्त करता है। 7. अवेस्ता — Yasna 31.18 𐬛𐬭𐬎𐬘𐬆𐬨 𐬀𐬑𐬀𐬌𐬙𐬌 𐬀𐬭𐬆𐬌𐬌𐬀 भावार्थ — असत्य और अधर्म दुःख तथा विनाश...