(१) ईशोपनिषद की सूक्तियाँ-- (१) ईशावास्य मिदं सर्वं। ईशोपनिषद--१ भाव-- (२) मा गृधःकस्यस्विद्धधनम्। ईशोपनिषद--१ भाव-- किसी के धन की इच्छा मत कर। (३) कुरर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतम् समाः। ईशोपनिषद--२ भाव--इस लोक में कर्म करते हुए ही सौ वर्ष जीने की इच्छा करे। (४) तदन्तरस्य सर्वस्य। ईशोपनिषद--४ भाव--वह (ईश्वर) सबके अन्दर है। (५) तदेजति तन्नेजति। ईशोपनिषद--५ भाव-- वह (ईश्वर) चलता है और नहीं भी चलता है। (६) तद्दूरे तद्वन्तिके। ईशोपनिषद--५ भाव-- वह (ईश्वर) दूर है और समीप भी है। (७) को मोहः का शोकः एकत्वमनुपश्यतः। ईशोपनिषद--७ भाव--एकत्व देखने वाले मनुष्य के लिए क्या मोह और क्या शोक ? (८) अन्धं तमः प्रविशन्ति ये अविद्यामुपासते। ईशोपनिषद--९ भाव-- जो अविद्या (कर्म) की उपासना करते हैं, वे घोर अन्धकार में प्रवेश करते हैं।...
ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या " भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:" ऋगुवेद --1/89/8 अर्थ-- हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें। यह ऋग्वेद का अत्यंत प्रसिद्ध शांति मंत्र है: मंत्र (ऋग्वेद-- 1.89.8): "भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः। स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिः व्यशेम देवहितं यदायुः॥" अर्थ: हे देवताओं! हम अपने कानों से शुभ (कल्याणकारी) बातें सुनें, अपनी आँखों से शुभ दृश्य देखें, हमारे अंग (शरीर) स्वस्थ और स्थिर रहें, और हम अपनी पूरी आयु ईश्वर के हितकारी कर्मों में व्यतीत करें। भावार्थ--: यह मंत्र हमें जीवन का एक आदर्श मार्ग दिखाता है— सुनना भी शुभ हो (अच्छी बातें, सकारात्मक विचार) देखना भी शुभ हो (अच्छे कर्म, अच्छे दृश्य) शरीर स्वस्थ रहे और जीवन ईश्वर के अनुसार, धर्म और कल्याण में लगे। यह केवल प्रार्थना नहीं है, बल्कि एक जीवन-दर्शन है— कि हमारा हर इन्द्रिय-व्यवहार (सुनना, देखना, करना) शुभ और सकारात्मक हो। वेदों में प्रमाण-- 1. यजुर्वेद (तैत्तिरीय आरण्यक 4.41 / यजुर्वेद 25.21) श्लोक: भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्...
(2) Guru Angad Dev Ji Maharaj--- Guru Angad Dev Ji Maharaj was born on 31 March, 1504 in the village Matte- De- Sarai in Firojpur district, Panjab. His name was Lehna. ln 1539, Guru Nanak Ji nominated him as the second guru and also gave him a new name Angad Dev after testing him in various ways. He was the son of Petty Trader named Pheru ji. His mother was Daya Kaur. Baba Narayan DasTrehan was his grand father. Mata Khivi ji was his wife. Sri Devi Chand was his father- in- law. Dasu and Datu were his sons. Bibi Amro ji and Bibi Anokhi ji were his daughters. He was devoted to Devi Jwalamukhi. He used to lead a batch of worshipers to Jwalamukhi temple every year. Once bhai Lehna ji heard the recitation of hymn of Guru Nanak Dev Ji from by Jodha Ji, who was a Sikh of Guru Nanak Dev Ji and was thrilled. He decided to proceed Jwalamukhi through Kartarpur to have a glimpse of Guru Nanak Ji. During his yearly pilgrimage to Jwalamukhi temple, he first met Guru Nanak Ji at Kartarpur...
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