डा०सूर्यपाल सिंह का उत्कृष्ट व्यक्तित्व : मनुष्यता की उज्ज्वल परंपरा के साधक (आदरणीय डॉ. ………… के व्यक्तित्व पर एक साहित्यिक व्यक्तित्व-चित्र) सृष्टि के विराट रंगमंच पर प्रतिदिन असंख्य मनुष्य आते हैं, अपना-अपना अभिनय पूरा करते हैं और समय की धारा में विलीन हो जाते हैं। किंतु कुछ विरले व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं जो अपने जीवन को अभिनय नहीं बनने देते; वे उसे साधना बना देते हैं। ऐसे लोग अपने युग की धड़कनों में बस जाते हैं। वे अपने लिए नहीं जीते, वे अपने समय की चेतना के लिए जीते हैं। उनके व्यक्तित्व की ऊष्मा केवल उनके परिवार या परिचितों तक सीमित नहीं रहती, वह समाज के विस्तृत आकाश में फैलकर अनेक जीवनों को आलोकित करती है। ऐसे व्यक्तित्वों का मूल्यांकन उनके पदों, पुरस्कारों या उपलब्धियों से नहीं किया जा सकता; क्योंकि उनका वास्तविक परिचय उनके चरित्र में, उनके व्यवहार में और उनके द्वारा स्पर्श किए गए असंख्य हृदयों में सुरक्षित रहता है। भारतीय संस्कृति ने सदैव ऐसे ही मनुष्यों को अपनी सबसे बड़ी संपदा माना है। हमारे यहाँ महानता का अर्थ अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व है; वैभव नहीं, विनम्रता है; और प्रसिद्ध...
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