ह० मूसा अ० का इल्मी इन्साफ:--
ह० मूसा अ० का इल्मी इन्साफ-- क़ुरआ़न के सूरा बकरा के आयत 67 से आयत 73 और हदीसों के हवाले से एक किस्सा पेश कर रहा हूँ। एक शख्स था जिसका नाम सालेह था। उसके पास एक बछिया थी, उसकी बीबी थी और एक छोटा बच्चा था। इसके सिवा उसके पास कुछ भी नहीं था। वह खुद बीमार रहता था मगर वह खुदा का महबूब था। अपनी बीबी के कहने पर एक दिन वह अपनी बछिया को लेकर जंगल में गया और खुदा से दुआ की। या खुदा ! तू रहमत वाला है। यह बछिया मैं तेरे हवाले करता हूँ। अब इसकी परवरिश तेरे ऊपर है। मेरा बेटा अभी बहुत छोटा है। जब वह बड़ा हो जाए तब उसको वापस दे देना। बछिया को वहीं छोड़ दिया और घर वापस आ गया। कुछ दिन बाद सालेह मर गया। वक्त बीतता गया। सालेह का लड़का अब बड़ा हो चुका था। वह माँ का बहुत ख्याल रखता था। एक दिन उसकी माँ ने कहा, ऐ मेरे बेटे ! तू जंगल को जा ! वहाँ जाकर अल्लाह को पुकारना और कहना ! मेरा बाप तेरे सुपुर्दगी में एक बछिया दे गया था और कहा था कि जब मेरा बेटा जवान हो जाएगा तब उसे वापस कर देना। उसका बेटा मैं हूँ। अब मैं जवान हो गया हूँ। या इलाही ! या खुदा ! वह गाय मुझे वापस कर दे। गाय उसके पास आ गयी। उसने खुदा को शुक्रिया कहा, और गाय को लेकर घर वापस आ गया। माँ के कहने पर वह इसे बेचने बाज़ार में ले गया। उसकी माँ ने उसे हिदायत दी थी कि बिना मुझसे मशविरा किए वह उस गाय को नहीं बेचेगा। उस समय गाय की कीमत तीन दीनार हुआ करती थी। एक खरीददार आया वह छः हज़ार दीनार दे रहा था, मगर उसकी शर्त यह थी कि वह अपनी माँ से मशविरा किए बिना ही गाय को बेच दे। लड़के ने गाय बेचने से इनकार कर दिया और आकर अपनी माँ से हालात का बयान किया। उसकी माँ ने कहा, वह कोई फरिश्ता होगा जो तुम्हारी आजमाईश को लिए आया होगा। आज जब वह आए तब उनसे पूछना कि मेरे हक़ में क्या अच्छा है। गाय को बेच देना या गाय को बेचने से अभी रोके रखना। लड़के ने जब पूछा, तो उस खरीददार ने कहा अभी मत बेचो। जब बनी इस्राईल वाले खरीदने आएँ तब उनसे कहना, कि इस गाय की खाल में जितना सोना समा जाए, हमें इस गाय के बदले में उतना सोना चाहिए। एक आ़मील नाम का बनी इस्राईल था, जो बहुत दौलत वाला था। उसके दो चचाज़ात भाई थे। दौलत की लालच में इन दोनों ने आ़मील की हत्या कर दी और खुद मुद्दई बन गए। आ़मील के करीबियों ने ह० मूसा अ० के पास इन्साफ के लिए गुज़ारिश की। ह० मूसा अ० ने उनसे से कहा कि एक गाय ढुूँढो जिसका रंग सुनहरा हो और जिसके जिस्म से सूरज जैसी किरणें निकल रही हों, जिसके बदन से खुशबू निकलती हो। वे ऐसी गाय को ढूँढने निकल पड़े। ढूँढते-ढूँढते वे सालेह के घर पहुँचे। यह वही गाय थी जिसकी तलाश में वे थे। गाय की कीमत पूछी। सालेह के लड़के ने गाय की वह कीमत बताई जितनी कीमत माँगने ये लिए फरिश्ते ने उनसे कहा था अर्थात् उतना सोना जितना गाय की खाल में समा सकता था। वे उस गाय को लेकर उस लड़के के साथ ह० मूसा के पास गए। ह० मूसा ने उस लड़के को उतना सोना दिलाने की जिम्मेदारी ली। अ० मूसा ने कहा आ़मील के लाश को इस गाय के जिस्म से छुआओ, आ़मील जी उठेगा और मारने वाले को खुद बयान करेगा। जैसे ही लाश को गाय से छुआया गया लाश ज़िंदा हो गयी और बयान किया कि मेरा क़त्ल मेरे चचाज़ात भाइयों ने दौलत के लिए की है। इतना कहकर वह फिर मर गया। उस लड़के को सोना दे दिया गया। उस समय की शरीयत के अनुसार इनके चचाज़ात भाइयों को दण्ड दिया गया। यह था ह० मूसा का इल्मी इन्साफ। इससे सबक क्या मिलता है ? पहला-- जो माँ बाप की कद्र करते हैं वह मालामाल हो जाते हैं। सालेह के बेटे को इतना अधिक सोना मिला कि वह मालामाल हो गया। दूसरा-- जब खुदा के सुपुर्दगी में कोई वस्तु रख दी जाती है तो उसे दुनिया वाले किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुँचा सकते हैं। सालेह की बछिया की परवरिश खुदा कर रहा था, उसे खूँखार जंगली जानवर शेर-बाघ आदि किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुँचा सके। तीसरा--गलत करने वाले को खुदा दण्ड ज़रूर देता है। सालेह के चचाज़ात भाइयों को उनके किये की सज़ा मिली। इसलिए यह सलाह है आपको कि अपने माँ- बाप का खयाल रखो, मालामाल हो जाओगे।अपने को हमेशा खुदा की सुपुर्दगी में रखो, महफूज रहोगे। नेक बनो, गलत काम मत करो दुनिया आपकी क़द्र करेगी और खुदा की रहमत मिलेगी क्योंकि खुदा नेक बन्दों को पसन्द करता है।
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