ह० मूसा अ० और शैतान की गुफ्तगू ( वार्तालाप)
ह० मूसा अ० और शैतान की गुफ्तगू--
ह० मूसा अ० के वफात (मौत) का जब वक्त आया तब शैतान ने आकर उनसे कहा, हुज़ूर ! आप खुदा के पास जा रहे हैं, मेरा उनसे सलाम कहिएगा और कहिएगा कि मैने आदम की औलादों पर कामयाबी पा ली है सिर्फ तीन चीज़ों के दायरे को बढ़ाकर।
(1) दौलत से मुहब्बत का दायरा-इन्सानों में दौलत से मुहब्बत तो पहले से ही रही है मगर इधर उसके दायरे को बढ़ा दिया है जिससे इन्सान, इन्सान का
दुश्मन बन गया है। गोया इन्सान खाली हाथ आया है और खाली हाथ जाता है फिर भी उसे दौलत से इतना प्यार है कि दौलत की वजह से बेटा बाप का कत्ल कर देता है। भाई-भाई का कत्ल कर देता है। दौलत के आगे सारे रिश्ते बेमानी हो गए हैं।
(2) गुस्सा का दायरा-- मैने इन्सान के गुस्से का दायरा बढ़ा दिया है। बात-बात में गुस्सा आता है। गुस्सा एक लम्हें में सालों से बनाए गए रिश्ते को तोड़ देता है। गुस्से का जुनून इन्सान पर चढ़ता है तब सत्यानाश होने के बाद ही उतरता है।
(3) औरत का दायरा-- औरत के दायरे को इतना अधिक बढ़ा दिया है कि एक बार जब इन्सान औरत की गिरफ्त में आता है तब वह भूल जाता है कि उसका कोई बाप भी है, उसकी कोई माँ भी है, उसका कोई भाई भी है, उसकी कोई कुआँरी बहन भी है। सारे रिश्ते वह आसमान में टाँग देता है, बस उसके सामने रिश्ता बचता भी है तो सिर्फ और सिर्फ उसकी पत्नी और उसके बच्चे।
ह० मूसा अ० शैतान की बातों को गौर से सुनते रहे और अलविदा कह कर इस दुनिया को छोड़कर चल दिए।
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