हर वस्तु का अपना अलग स्वभाव होता है-------
हर वस्तु का अपना अलग स्वभाव होता है------ विष जीवों को मार देता है। विष जैसे ही शरीर के अन्दर जाता है, जीव छटपटाकर अपना प्राण खो देता है। विष चाहे दूध के साथ लिया जाए, अथवा मिष्ठान के साथ। पानी के साथ लिया जाए अथवा किसी अन्य खाद्य पदार्थ के साथ। विष अपना प्रभाव डालेगा ही। पारस पत्थर लोहे को सोना बना देता है। यह पारस का स्वभाव है। मैं परोपकार का ध्येय लेकर समाज की सेवा में लग गया। समाज ने मेरी सेवा में मेरे स्वार्थ को झाँकने का प्रयास किया। इसलिए कि मनुष्य बिना स्वार्थ के इस संसार में कोई काम नहीं करता है। मनुष्य स्वार्थी स्वभाव का होता है। वह अपने इसी स्वभाव के कारण दूसरों के द्वारा किए गए कार्य में भी उसका स्वार्थ ढूँढता है। मगर मनुष्य अच्छा है या बुरा, मनुष्य स्वार्थी है अथवा परोपकारी, मनुष्य झूठा है अथवा सत्यवादी। इन गुणों अथवा अवगुणों का पैमाना केवल समाज ही है। समाज अपने तराजू से ही दूसरों को तौलता है। यदि कोई समाज ही बुरा है तो उसकी माप अथवा तौल कैसे सही हो सकती है ? उम्र ढलने के बाद मुझे लगा कि मनुष्य के कार्यों का आकलन समाज के अतिरिक्त ईश्वर भी करता है। ईश्वर मनुष्य के द्वारा किए गए कार्यों का फल देता है। ईश्वर जीवों पर सदैव कृपा भाव रखता है। ईश्वर का स्वभाव है कृपा करना। निष्कर्ष यह है कि मनुष्य जितना समय समाज की दृष्टि में अच्छा बनने के लिए व्यय करता है, उसका कुछ अंश ही निष्काम भाव से बिना स्वार्थ के ईश्वर की आराधना में लगाए तो उसका कल्याण सम्भव है। ईश्वर की कृपा के संदर्भ में सधना कसाई की कथा प्रचलित है। आप मांस बेचने का कार्य छो़ड़कर भगवान के भक्त हो गए थे। आप जगन्नाथ जी का दर्शन करने जगन्नाथ पुरी की ओर चले। पैदल यात्रा थी। पुरी अभी दूर थी। आपने सोचा, यहीं गाँव में किसी के यहाँ भोजन माँग कर खा लेंगे, और वहीं सो जाएँगे। गाँव में पहुँचकर एक दरवाज़े को खटखटाया। एक तरुणी निकली। आपको अंदर बुला लिया। चारपाई पर बैठाया। भोजन पकाकर खिलाया। बिस्तर लगा दिया। आपके पूछने पर उसने बताया। घर में उसके एक बीमार पति है, जो उसके काम का नहीं। आप थके थे। सो गए। आधी रात को अर्ध नग्न अवस्था में वह आपके बिस्तर पर आयी। आपने उससे कहा, बहन यह क्या कर रही हो ? वह गयी और अपने पति का सर काटकर ले आयी और कहा, हमारे और तुम्हारे बीच में यही तो अड़चन था, इसे खत्म कर दिया। अब आज से हम तुम्हारे साथ में ही रहेंगे। आपने कहा, यह क्या किया ? तुम डाइन हो। ऐसा कहकर आप उठे और बाहर जाने लगे। काम बनता हुआ न देखकर वह चिल्लाई, इसने मेरे पति की हत्या कर दी। लोग आपको पकड़कर राजा के पास ले गए। राजा ने आपके दोनो हाथ कटवा दिए। आप इसी स्थिति में पुरी की ओर चले। पुजारी को स्वप्न हुआ। मेरा भक्त मेरे दर्शन हेतु आ रहा है। आप उसे पालकी भेजकर बुलवा लीजिए। आप पालकी में पुरी लाए गए। आपने प्रार्थना हेतु जब ऊपर हाथ उठाया, तो आपके दोनो हाथ पहले जैसे हो गए।-यह है ईश्वर का कृपा कारक स्वभाव।-------+----------+----------+--------+
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