-----काम, क्रोध और लोभ का रोग---
काम--इस रोग में व्यक्ति सामाजिक मर्यादा को भूल जाता है। यह मन का वात रोग है।
क्रोध--इस रोग में व्यक्ति वर्षों का सम्बन्ध पल भर में तोड़ देता है। यह मन का पित्त रोग है।
लोभ--इस रोग में व्यक्ति दूसरों के धन को अपना बनाने का प्रयास करता है।
यह मन का कफ रोग है।
वात (काम), पित्त (क्रोध) और कफ (लोभ) यदि तीनो प्रबल हो जाएँ तो सन्निपात हो जाता है। व्यक्ति विक्षिप्त हो जाता है। बेतरतीब बोलता है। अमर्यादित व्यवहार करता है। उचित - अनुचित का भेद नहीं कर पाता है।
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