गर्म दूध से जली बिल्ली छाछ को भी फूक-फूक कर पीती है।
हम इसे अच्छी तरह से जानते हैं और रोज़ ही लोगों से यह सुनते हैं कि दूध की जली बिल्ली छाछ को भी फूक-फूक कर पीती है परन्तु हम रोज़ इस संसार द्वारा अपमानित किए जाते हैं, हम इस संसार की बेहतरी के लिए हर सम्भव प्रयास करते रहते हैं फिर भी यह संसार हमें दुतकारता रहता है समाज की भलाई के लिए दिन- रात लगे रहते हैं इसके बाद भी बुरे कहे जाते हैं,अपनों के लिए तो हम दिन-रात श्रम करते रहते हैं फिर भी गरियाए जाते हैं, लतियाए जाते हैं मगर हम इस संसार को नहीं छोड़ पाते हैं आखिर वह दिन जीवन में कब आएगा जब हम यह सब छोड़कर ईश्वर की ओर मुड़ेंगे।
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