मन को ईश्वर के निकट ले जाना ही होगा

जब हमें भूख लगती है तो हमें भूख मिटाने हेतु भोजन तक जाना होता है, भूख-भूख कहने से भूख कभी नहीं मिटती है। प्यास लगती है तो हमें प्यास मिटाने हेतु पानी के निकट जाना होता है, प्यास- प्यास‌ कहने से प्यास कभी नहीं मिटती है। ठंढ लगती है तो ठंढ मिटाने हेतु आग तक जाना होता है। ठंढ- ठंढ कहने से ठंढ कभी नही मिटती है इसी तरह जाप-पाठ से कुछ भी नहीं मिलने वाला नहीं है यदि आपको ईश्वर से कुछ चाहिए तो ईश्वर के निकट मन को ले जाना ही होगा।

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