-------शकुन शास्त्र-----
शकुन एक पक्षी या नाम है। इसे संस्कृत में शकुन्त कहते हैं। महर्षि विश्वामित्र और मेनका अप्सरा से एक कन्या ने जन्म लिया था। कन्या के जन्म लेते ही अपनी पुत्री को जंगल में छोड़कर महर्षि विश्वामित्र पुनः तपस्या हेतु चले गए। अप्सरा मेनका स्वर्ग लोक चली गयी। शकुन्तों ने इस कन्या का पोषण किया, जिसे बाद में कण्व ऋषि अपने आश्रम में विवाह होने तक पालन- पोषण किया। कन्या का प्रारम्भिक पोषण शकुन्त पक्षियों ने किया था, इसलिए इसका नाम शकुन्तला रखा गया। शकुन्तला का विवाह हस्तिनापुर नरेश महाराज दुष्यन्त से हुआ, जिनके पुत्र का नाम भरत था। इन्हीं महाराज भरत के नाम पर ही अपने देश का नाम भारतवर्ष पड़ा और शकुन्त पक्षी के
नाम पर शकुनशास्त्र रखा गया। आस-
पास के जीव जन्तुओं की गतिविधियों
से जुड़े शास्त्र को शकुनशास्त्र कहते हैं।
शकुनशास्त्र ज्योतिष का एक भाग है।
राजस्थान के लोक देवता हड़बू जी, जिनके पिता का नाम मेहाजी सांखला था और बैंकटी गाँव, भुड़ैल, नागौर, राजस्थान के रहने वाले थे। यहाँ मन्दिर में आपके गाड़ी की पूजा होती है, आप इस गाड़ी से विकलांग गायों के लिए चारा काटकर लाया करते थे। आप
शकुन शास्त्र के ज्ञाता माने जाते हैं।
शकुनशास्त्र से अकस्मात् घटित होने वाली घटनाओं से हमें भविष्य कि बातों की जानकारी मिलती है। जैसे घर से निकलते समय यदि हमें सामने की ओर से आते हुए अथवा रास्ता पार करते हुए तोता, मोर, नीलकण्ठ, सफेद कबूतर, गौरैया अथवा मैना दिख जाए तो यह एक शुभ सन्देश है और कार्य सिद्धि का
सूचक है, इसी तरह यदि प्रातः तोता, मोर, नीलकण्ठ के दर्शन हो जाए तो व्यक्ति का दिन अच्छा गुज़रता है। गौरैया का घर में आना और घोसला बनाना अच्छा माना गया है। यदि प्रातः
चिड़ियों कि चहक सुनायी देती है तो घर में खुशियाँ आने वाली हैं ऐसा कहा जाता है। जाते समय यदि रास्ते में कौआ, बाज, चील मिल जाए अथवा मांस का टुकड़ा ले जाते हुए दिख जाए
तो कार्य अवश्य सिद्ध होगा। घर से निकलते ही गाय दिखे, अथवा गाय को रम्भाने की आवाज़ सुनायी दे तो शुभ होता है और कार्य बनने का संकेत होता है। गोद में बच्चा लिए हुए महिला दिखे, बुज़ुर्ग का शव जाते हुए दिखे, बिल्ली का बच्चा दिखे, दूध या पानी से भरी बाल्टी दिखे तो शुभ है, कार्य बनता
है। सुबह छिपकली का दर्शन हो अथवा
यह ऊपर चढ़ती हुयी दिखे तो धन लाभ होता है। यात्रा में जाते समय यदि खाली बाल्टी दिखे तो अशुभ होता है, कार्य बिगड़ता है। बार-बार दूध गिरे, सोने का आभूषण गिर जाए, रास्ते में सिक्का या नोट मिले तो अशुभ है, धन हानि होगी। पूजा की थाली गिरे तो अशुभ है। बर्तन से दूध गिरे तो धन हानि होगी। सिन्दूर गिरे तो पति से मनमुटाव होगा। नमक गिरे तो जीवन साथी से मनमुटाव होगा। दूध गर्म करते समय उबल कर गिरे तो धनागम होगा। दूध अथवा सरसो का तेल बिखर जाए तो दुर्घटना का संकेत है। सूखे पेड़ पर गिद्ध दिखना, घर पर आकर बाज बैठना, संकट के आगमन का सूचक है। आगे कुछ आसपास की वस्तुओं और जीव जन्तुओं की गतिविधियों से होने वाले शुभ और अशुभ की चर्चा अलग- अलग करेंगे।
------------कबूतर ------------
कबूतर का घर में आना शुभ है। कबूतर को दाना चुगाइए, ग्रह अनुकूल होंगे। घर में अगर कबूतर घोंसला बनाते हैं तो अशुभ है, यह आने वाला समय दुर्भाग्य और कष्ट लेकर आता है।
------मकड़ी-----------
घर मे मकड़ी का होना अशुभ होता है, घर में यदि अधिक मकड़ियाँ हैं तो अधिक शत्रु होंगे। मकड़ी यदि नीचे
की ओर जाती दिखे, तो प्रिय बिछोह होगा। यदि मकड़ी ऊपर की ओर जाती हुयी दिखे तो शुभ होता है, प्रिय मिलन होता है। यदि कपड़े के ऊपर चढ़ जाए तो शुभ होता है, नया वस्त्र मिलता
है। जाला बुनते हुए दिखे, तो शुभ होता है, कार्य बनता है।
--------कौआ---------
एक ऋषि के साथ एक सफेद कौआ
रहता था। एक दिन ऋषि ने कौआ को अमृत कुण्ड को खोजने के लिए भेजा,
और साथ में यह भी कहा कि जब कुण्ड का पता लगा जाए तो सीधे मेरे पास आना, उसे जूठा मत करना। कौआ अमृत कुण्ड को खोजने के लिए उड़ा।
वर्ष भर कौआ अमृतकुण्ड खोजता रहा, कभी यहाँ- कभी वहाँ, और एक दिन वह अमृतकुण्ड उसे मिल गया जिसकी खोज में वह निकला था। गर्मी के दिन थे उसे बहुत प्यास लगी हुयी थी, वह अपनी प्यास बर्दाश्त नहीं कर सका। अमृत उसके सामने था, कुछ अमृत उसने अपनी प्यास बुझाने के लिए उस कुण्ड से पी लिया। उसे इस बात का दुख था कि उसके द्वारा अमृतकुण्ड का अमृत जूठा हो गया था, परन्तु इस बात की उसको खुशी भी थी कि उसने अमृत
कुण्ड की खोज कर ली थी। वह ऋषि के पास आया, उसने सारी बात बतायी।
ऋषि ने उसे शाप दे दिया कि आज से तू
मांसाहारी हो जाएगा, तुझसे लोग नफरत करेंगे। तू काँव- गाँव करता रहेगा, तुझे कोई चैन से बैठने नहीं देगा।
तेरा मांस भी किसी के काम नहीं आएगा। इतना कहकर उसे पकड़ लिया और अपने कमण्डल में, जिसमें काले रंग का एक द्रव्य भरा हुआ था, डुबो दिया। तभी से कौवा काले रंग का हो गया। कौवा न कभी बूढ़ा होता है और न अपनी स्वाभाविक मौत से मरता है क्योंकि यह अमर कौआ की औलाद है। इसकी मौत हमेशा दुर्घटना से होती है। कौआ यम का दूत कहलाता है। यह चतुर बहुत होता है। कौआ के अण्डे और कोयल के अण्डे एक जैसे होते हैं। मादा कौआ अपने अण्डों को कोयल के घोसले में रख आती है।अण्डे से निकलने वाले बच्चे भी एक जैसे होते हैं। जब ये उड़ने वाले हो जाते हैं तब ये उड़कर अपनी जमात में चले जाते हैं।
श्वेत कौआ के शकुन निष्फल होते हैं।
कौआ भूमि खोदते हुए दिखे, तो धन लाभ होता है। काँटेदार वृक्ष पर बैठकर बोलता हुआ दिखे तो दुख मिलता है।
कौआ पीछे बोले तो समस्या से मुक्ति मिलती है। कौआ चोंच में तिनका अथवा रोटी लिए दिखे तो कोई कीमती वस्तु अथवा धन मिलता है। कौआ का झुण्ड घर पर आकर एक साथ बोले तो घर के मालिक को कष्ट होगा।
सूर्योदय के समय पूर्व दिशा में कौआ बोले तो कार्य सिद्ध होता है, शत्रु की हानि होती है। उत्तर दिशा में बोले तो
सर्प का भय होता है, दरिद्रता आती है।
दोपहर के समय कौवे की आवाज़ उत्तर दिशा अथवा पूर्व दिशा से आए तो शुभ होता है, घर में सुख शान्ति आती है।
दक्षिण की ओर मुख करके बोले तो अशुभ होता है, मृत्यु तुल्य कष्ट मिलता है। यदि कौवा पानी पीता हुआ दिख जाए तो शुभ होता है, धन लाभ होता है, कार्य बनता है। कौवा बीट कर दे तो धन- हानि होती है, मानसिक कष्ट मिलता है। कौवा सिर पर स्पर्श करता हुआ जाए तो मृत्यु तुल्य कष्ट मिलता है, अथवा बहुत अधिक नुकसान होता है।
यदि किसी अन्य अंग को स्पर्श करता हुआ जाए तो शुभ होता है। बहुत अधिक धन मिलता है।
--------झाड़ू---------
झाड़ू घर में लक्ष्मी का प्रतीक है।
दीपावली में झाड़ू लाना शुभ होता है।
इससे लक्ष्मी का घर में प्रवेश होता है।
गृह प्रवेश से पूर्व नए घर के लिए झाड़ू लाना शुभ होता है। इससे लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। झाड़ू पर पैर रखना अशुभ होता है, इससे लक्ष्मी रुष्ट होती हैं। अबोध बालक घर में सहसा झाड़ू लगाने लग जाए तो समझ लीजिए कि मेहमान आने वाले हैं।
-------दर्पण-------
टूटा दर्पण घर में रखना अशुभ होता है,
दरिद्रता आती है। घर से निकलते समय दर्पण देखना शुभ होता है, सम्मान मिलता है और कार्य बनता है। बाहर जाते समय टूटा दर्पण देखना अशुभ होता है, सम्मान को ठेस पहुँचता है।
एक वर्ष अथवा इससे कम उम्र के बच्चे को दर्पण दिखाना अशुभ होता है।
-------लोहा----------
लोहे को रखना शुभ होता है। यह बुरी आत्माओं को भगाता है। हेयर पिन घर में लटकाकर रखना शुभ होता है। यदि
हेयर पिन मार्ग में मिल जाए तो मित्र से मिलन होगा और यदि मार्ग में खो जाए तो शत्रु बढ़ेंगे। चाबियों के गुच्छों पर जंग चढ़ना शुभ होता है। धनागम होता है।
चाबियों का गुच्छा बच्चे के तकिए के नीचे रखना शुभ होता है। बच्चा बुरी आत्माओं से सुरक्षित रहता है। जेब और पर्स को खाली रखना अशुभ होता है। जहाँ तक सम्भव हो सिक्का रखिए।
छुरी और काँटे को क्रास में रखना अशुभ होता है, भोजन की गुणवत्ता में कमी आ जाती है। बच्चे के तकिए के नीचे चाकू रखना शुभ होता है, छोटा चाकू गले में पहनाना भी शुभ होता है। इससे बच्चा बुरी आत्माओं से बचा रहता है।
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