------------स्वप्न विचार------------
----------स्वप्न फल---------------
स्वप्न क्या है ? इसके बारे में महान् दार्शनिक हेपोक्रेट्स ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि नींद में आत्मा बाहर निकलकर जो कुछ देखतासुनता है, वही स्वप्न है। प्लेटो ने स्वप्न को दैहिक एवं मानसिक लक्षणों की अभिव्यक्ति के रूप में व्यक्त किया है।
मनोवैज्ञानिक कार्लयुग ने बताया कि
स्वप्न बीते हुए कल और आने वाले कल की ओर संकेत करते हैं। इस सम्बन्ध में
यहाँ कुछ घटनाओं का उल्लेख किया जा रहा है। स्वप्न विश्लेषक जे आर ब्लैण्ड ने फारस के प्रसिद्ध शासक नौशेरवाँ के एक स्वप्न का उल्लेख किया है। नौशेरवाँ ने एक स्वप्न देखा कि वह सोने के प्याले में मदिरा पी रहा है, ज्यों ही प्याला रखा, एक काला कुत्ता आया, वह उसी प्याले में मदिरा पीने लगा। जब
बादशाह नौशेरवाँ ने प्रातः यह घटना अपने मंत्री बुज्रमिहिर से बताया, तो मंत्री ने बादशाह से कहा, यदि गुस्ताखी माफ की जाए तो मैं इस स्वप्न की
ताबीर कर सकता हूँ। बादशाह ने इजाज़त दे दी। मंत्री ने बताया, राजन् ! महारानी का एक काले रंग का दास है जो महारानी का प्रेमी है। बादशाह नौशेरवाँ को यकीन नहीं हो रहा था कि ऐसा भी हो सकता है। बादशाह महारानी और काले रंग वाले दास पर नज़र रखने लगे और एक दिन बादशाह ने खुद अपनी आँखों से देखा तब उन्हें अपने मंत्री की बात तथा उस देखे हुए स्वप्न पर यकीन आया।
गौतम बुद्ध के जन्म के समय इनकी माँ योगमाया ने स्वप्न देखा था कि उनके शरीर में छः दाँतों वाले हाथी ने प्रवेश किया है। ज्योतिषियों ने बताया कि जन्म लेने वाला बालक चक्रवर्ती सम्राट बनेगा अथवा महान संत। भविष्य में यह बात सत्य साबित हुयी। श्री अरविन्द एवं श्री माँ ने 'स्लीप्स एवं ड्रीम्स' में लिखा है कि एक यात्री एक होटल में ठहरा हुआ था। रात्रि में उसने स्वप्न देखा कि सामने एक अर्थी रखी हुई है। एक वेटर उस यात्री को अर्थी में जाने का इशारा कर रहा है। प्रातः जब वह यात्री अपने कमरे से बाहर आया और बाहर जाने से लिए लिफ्ट की तलाश करने लगा, तभी वही वेटर जिसे यात्री ने स्वप्न में देखा था, वह उस यात्री को लिफ्ट में जाने के लिए इशारा करने लगा। यात्री लिफ्ट में जाने के लिए आगे बढ़ा, तभी वह लिफ्ट टूट गयी और उस पर सवार सभी लोग मारे गए।
पचास के दशक में महान् दार्शनिक फ्रायड ने स्वप्न के सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त किए। फ्रायड के अनुसार मन के तीन भाग होते हैं।
(१) चेतन मन (२) अचेतन मन (३)
अवचेतन मन।
(१) चेतन मन--इसमें व्यक्ति अपनी सभी इच्छाओं की तृप्ति करता है।
(२) अचेतन मन-- व्यक्ति अपनी जिन इच्छाओं की तृप्ति चेतन मन में नहीं कर पाता है उन इच्छाओं को व्यक्ति बरबस अचेतमन में भेज देता है। ये दमित इच्छाएँ बाहर चेतन मन में आने का प्रयास करती रहती हैं परन्तु व्यक्ति इन्हें
बाहर आने से रोकता रहता है।
(३) अवचेतन मन--अचेतन मन की इन दमित इच्छाओं को अवचेतन मन स्वप्न
द्वारा पूरा कराता है। फ्रायड ने आगे बताया कि अचेतन मन में अधिकाँश कामेच्छाएँ ही होती हैं , इसलिए व्यक्ति अपनी कामेच्छाओं को स्वप्न द्वारा पूरा करता है।
स्वप्न के बारे में एक धारणा यह भी है कि व्यक्ति जब सामान्य मृत्यु प्राप्त करता है तब वह शीघ्र ही दूसरा शरीर ग्रहण कर लेता है। परन्तु व्यक्ति जब दुर्घटना आदि से असामान्य मृत्यु प्राप्त करता है तब वह शीघ्र दूसरा शरीर
ग्रहण नहीं कर पाता है जिसके कारण उसकी आत्मा इधर-उधर भटकता रहता है। यह आत्मा अपने मित्रों से अथवा अपने शत्रुओं से आकर स्वप्न में संवाद करता है। यह आत्मा (प्रेतात्मा) अपने शत्रुओं को परेशान भी करता है, यदि शत्रु का दिमाग़ हल्का होता है तो वह (शत्रु) अवसाद की स्थिति में आ जाता है और वह उस प्रेतात्मा को जागृति अवस्था में भी देखने का आभास करने लगता है। यह स्थिति बहुत जटिल होती है, कई बार यह प्रेताक्मा अपनेे शत्रु का प्राण भी ले लेता है।
एक धारणा यह भी है कि हमारा दिमाग़
नींद को पूरा करने के लिए सपने दिखाता है। सपने ' रैपिड आई मूवमेण्ट'
(आर ई एम) की स्टेज में ही आते हैं। यह स्टेज नींद के हर एक चक्र के
आखिरी समय में आती है।
अरस्तू ने बताया कि स्वप्न केवल मनुष्य ही नहीं देखता है बल्कि पशु भी स्वप्न
देखते हैं।
मत्स्यपुराण के अनुसार प्रथम प्रहर का देखा हुआ स्वप्न अपना फल एक वर्ष तक दे देता है। द्वितीय प्रहर का देखा हुआ स्वप्न अपना फल छः माह तक दे देता है। तृतीय प्रहर का देखा हुआ स्वप्न अपना फल तीन माह तक दे देता है। चौथे प्रहर का देखा हुआ स्वप्न अपना फल एक माह तक दे देता है। सूर्योदय के समय देखा हुआ स्वप्न अपना फल दस दिन को अन्दर दे देता है। नींद विशेषज्ञ डा० ड्रे रूप ने स्वप्न पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि स्वप्न व्यक्ति परक होते हैं।
मत्स्य पुराण के 242 वें अध्याय में स्वप्न के बारे में विशद वर्णन किया गया है।
इसके अनुसार स्वप्न दो प्रकार के होते हैं। (१) शुभ स्वप्न (२) अशुभ स्वप्न
(१) शुभ स्वप्न--द्विज, पर्वत, राजमहल, हाथी, घोड़ा और वृषभ पर चढ़ना हित कारक है। तथा श्वेत पुष्पों वाले वृक्षों पर चढ़ना शुभप्रद है। नाभि में वृक्ष और तृण का उत्पन्न होना , अनेक हाथों का होना, अनेक सिरों का होना, फल दान,
सुन्दर श्वेत माला धारण करना, श्वेत वस्त्र धारण करना, चन्द्रमा, सूर्य और ताराओं को हाथ से पकड़ना, इन्द्रघनुष को पकड़ना या उसे ऊपर उठाना, पृथ्वी और समुद्रों को निगलना, शत्रुओं का संहार करना, संग्राम, विवाद और जुए में जीतना, कच्चा मांस, और मछली खाना, रक्त का दर्शन तथा रक्त में स्नान, मदिरा, रक्त अथवा दुग्ध का पीना, अपनी आँतों से पृथ्वी को बाँधना, निर्मल आकाश को देखना, भैंस, गाय, सिंहनी, हथिनी तथा घोड़ियों को मुख से दुहना, देवता, गुरु और ब्राह्मणों की प्रसन्नता देखना शुभ है।
जल से अभिषेक होने पर राज्य पद मिलता है। राज्याभिषेक, सिर का कटना, मृत्यु, घर का प्रज्वलित होना, या घर में आग लगना, राज्य चिह्नों की प्राप्ति, वीणा का स्वर सुनायी पड़ना,
जल में तैरना, दुर्गम स्थानों को पार करना, घर में घोड़ी, हथिनी तथा गायों को बच्चा देना, घोड़े पर सवार होना तथा रोना, सुन्दर स्त्रियों की प्राप्ति तथा
उनका आलिंगन, जंजीरों द्वारा बन्धन, मल का लेपन, जीवित राजाओं तथा मित्रों के दर्शन, देवताओं तथा निर्मल जल का दर्शन, ये स्वप्न शुभ होते हैं। हे राजन ! मनुष्य इन शुभदायक स्वप्नों को देखकर बिना प्रयास ही निश्चित रूप से धन प्राप्त कर लेता है तथा रोगग्रस्त मनुष्य भी रोग से मुक्त हो जाता है। शुभ स्वप्नों को देखकर मनुष्य को पुनः सोना नहीं चाहिए।
(२) अशुभ स्वप्न--नाभि के अतिरिक्त अन्य अंग में तृण अथवा वृक्ष का उगता हुआ देखना, मुण्डन होते हुए देखना, नग्न देखना, मलिन वस्त्रों को धारण करना, तेल लगाना, कीच में धँसना, ऊँचे स्थानों से गिरना, झूले पर चढ़ना, कीचड़ और लोहे को इकट्ठा करना, घोड़ों को मारना, लाल पुष्प वाले वृक्षों पर, शूकर, रीक्ष, गधे और ऊँटों पर चढ़ना, मछली, तेल और खिचड़ी का भोजन करना, नाचना, हँसना, विवाह और गायन होते हुए देखना, वीणा को छोड़कर अन्य वाद्यों का स्वागत करना, जल के तालाब में स्नान करने के लिए जाना, गोबर लगाकर जल में स्नान करना, कीचड़ युक्त जल में स्नान करना, थोड़े जल में स्नान करना, माता के उदर में प्रवेश करना, चिता पर चढ़ना, ध्वज का गिरना तथा चन्द्रमा और सूर्य का पतन देखना, दिव्य अंतरिक्ष का दर्शन करना, देवता, राजा और गुरु का क्रोध देखना, कुमारी कन्याओं का आलिंगन करना, पुरुषों के साथ सम्भोग करना, अपने ही शरीर का नाश होते हुए देखना वमन करना और दक्षिण दिशा की यात्रा करना, किसी व्याधि से पीड़ित होना, फलों तथा पुष्पों की हानि देखना, घरों की सफाई करना, घरों का गिरना देखना, माँस भक्षी जीव, वानर, रीक्ष और मनुष्य के साथ क्रीड़ा करना, शत्रु से पराजित होना, काषाय वस्त्र को धारण करना, तेलपान या तेल में स्नान करना, लाल पुष्प तथा लाल चन्दन को धारण करना, इन सपनों को देखकर फिर सो जाना चाहिए। ये स्वप्न अशुभ हैं।
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