------गौली शास्त्र (छिपकली विचार)-----

Gauli shastra is the science of Lizard's falling. It is the segment of Astrology. छिपकलियाँ माँ लक्ष्मी की प्रतिक होती हैं। ये स्वरभान राक्षस के धड़ भाग (केतु) का प्रतिनिधित्व करती हैं जिसके सिर को भगवान विष्णु ने काट दिया था। इनका घरों में रहना शुभ माना जाता है। विश्व भर में इनकी पाँच हज़ार प्रजातियाँ पायी जाती हैं। जो प्रजाति अपने देश में पायी जाती है, उसे गेको (Gecko) कहते हैं। ये छिपकलियाँ मच्छर, मकड़ी, भृंग, पतंग, झींगुर जैसे कीटों को खाकर हमारे घरों को साफ रखती हैं। इनसे मानव जाति को कोई खतरा नहीं होता है। इनकी आँखों पर पलकें नहीं होती हैं। इसलिए  ये अपनी आँख अपनी जीभ से चाट कर  साफ कर लेती हैं। इनकी पूँछ कट  जाने पर दूसरी उग आती है।
दीपावली के दिन छिपकली देखना शुभ होता है। घर में प्रवेश करते समय यदि इनकी आवाज़ सुनाई पड़े तो धन-लाभ होता है। नये घर में इनकी उपस्थिति अत्यन्त शुभ होती है, ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मी का प्रवेश हुआ है। दो छिपकलियों को सम्भोग करते हुए देखना शुभ होता है अथवा शीघ्र ही स्त्री सुख मिलता है। परन्तु छिपकलियों को आपस में लड़ते हुए देखना अशुभ होता है, और इसके लिए कहते हैं कि शीघ्र ही कोई विवाद छिड़ने वाला है। ऐसी मान्यता है कि जब मानव के दाएँ अंग पर छिपकली गिरती है तो शुभ होता है और जब बाएँ अंग पर गिरती है तब अशुभ होता है।
मानव शरीर पर छिपकली गिरने का शुभ-अशुभ फल--
(१) सिर पर गिरने पर --- मृत्यु निकट।
(२) माथे पर-- सम्पत्ति मिले।
(३ ) दाहिने कान पर--आभूषण मिले।
(४) बाएँ कान पर --आयु में वृद्धि हो।
(५) दायीं आँख पर--प्रिय मिलन।
(६) बायीं आँख पर--हानि।
(७) नाक पर--भाग्योदय।
(८) दाएँ गाल पर--आयु वृद्धि।
(९) बाएँ गाल पर-पुराने मित्र से मिलन।
(१०) गर्दन पर--यश मिले, शत्रु नाश।
(११) भौंह पर -- धन हानि।
(१२) दाढ़ी पर --भयावह घटना।
(१३) मुख पर-- मधुर भोजन।
(१४) होठों पर--धन हानि।
(१५) मूछ पर--सम्मान मिले।
(१६) दायीं भुजा पर--धन,सम्मान मिले।
(१७) बायीं भुजा पर--धन नाश।
(१८) दायीं हथेली पर--वस्त्र लाभ।
(१९) बायीं हथेली पर--धन हानि।
(२०) दायें कन्धे पर--विजय मिले।
(२१) बायें कन्धे पर-- शत्रु बढ़ें।
(२२) दायीं छाती पर --यश मिले।
(२३) बायीं छाती पर-गृह कलह हो।
(२४) पेट पर -- आभूषण मिले।
(२५) नाभि पर-- मनोकामना पूरी हो।
(२६) कमर के बीच में--आर्थिक लाभ।
(२७) दायीं पीठ पर --सुख मिले।
(२८) पीठ के मध्य--गृह कलह हो।
(२९) बायीं पीठ पर--रोग हो।
(३०) दायीं जाँघ पर-- सुख मिले।
(३१) बायीं जाँघ पर-- दुख पर मिले।
(३२) दायें घुटना पर--यात्रा हो।
(३३) बायें घुटना पर-- बुद्धि में कमी।
(३४) दायें पैर पर-- यात्रा हो।
(३५) बायें पैर पर--गृह कलह।
(३६) दायें तलवे पर--धन लाभ।
(३७) बायें तलवे पर--धन हानि।
शरीर पर छिपकली गिरने के बाद ऊपर की ओर चले तो शत्रु पर विजय मिलती है। परन्तु शरीर पर गिरने के बाद यदि नीचे की ओर चले तो धन हानि होती है।
जब छिपकली ज़मीन पर गिरती है, तो गृह कलह होती है। जब ज़मीन पर रेंगती हुयी दिखती है तो धन लाभ होता है। मरी हुयी छिपकली देखना अशुभ होता है। तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित वरदराज पेरुमल मन्दिर में दो छिपकलियाँ (एक सोने की और दूसरी चाँदी की बनी हुयी ) स्थापित हैं जिनको
छूने से छिपकली गिरने का प्रभाव नहीं होता है। इस अध्याय की सभी बातों को मान्यताओं और अनुभव के आधार पर लिखा गया है।
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