--------:छींक विचार:----------
सर्दी-जुकाम से समय छींक आना सामान्य बात है परन्तु स्वस्थ व्यक्ति को जब छींक आती है तब छींक पर विचार करते हैं। छींक आने पर प्रायः लोगों को
ॐ शान्ति कहते हुए सुना होगा। छींक के आने पर यह भी कहा जाता है कि भूत-प्रेत छींक के द्वारा अन्दर प्रवेश करते हैं और अन्दर ईश्वर का निवास होने के कारण ये बाहर निकल आते हैं। जो भी हो, जैसा भी हो, बहुत काल से छींक का विचार होता आया है और अनन्त काल तक होता रहेगा। एक मान्यता को अनुसार बाएँ और पीछे की छींक शुभ तथा दाएँ और आगे की छींक अशुभ होती है।
किसी कार्य के करने के प्रारम्भ में यदि व्यक्ति को छींक आ जाती है तो शुभ हे। यदि दूसरे को छींक आती है तो इसके शुभ-अशुभ फल पर विचार करते हैं।
जातेश्रुते तेन न किंचिदेव कुर्यात्श्रुत प्राण हरं गवां तु ।----बसन्तराज शाकुन ;वर्ग--६/श्लोक--२
अर्थ-- छींक होने पर कोई कार्य करने योग्य नहीं है तथा गमन पर छींक तो प्राण घातक होती है।
निषिद्धम् ग्रे अक्षणि दक्षिणे च धनक्षयं
दक्षिणा कर्ण देशे। तत् पृष्ठभागे कुरु ते
अरि वृद्धम् क्षुतं कृकानां शुभ माद धाती।
भोगाय वाम श्रवस्यपृष्ठे कर्णे च वामे
कथितं जघाय। सर्वार्थ लाभाय च वाम
नेत्रे जातं क्षुतं स्यात्क्रमतोष्ट धैवम्।
--बसन्त राज; वर्ग--६/ श्लोक--३,४
भाव-- (१) सामने की छींक हो तो कार्य छोड़ दें।
(२) दायें नेत्र से आगे छींक हो तो कार्य नहीं होगा।
(३) दायें कान के पास और आगे की छींक हो तो धन का नाश होगा।
(४) दायें कान के पीछे की ओर छींक हो तो दुश्मन बढ़ेंगे और घर पर लड़ाई होगी।
(५) कण्ठ के आगे वा पीछे छींक हो तो अति शुभ फल दायक है।
(६) बायें कान के पास और आगे की ओर छींक हो तो शुभ होता है।
(७) बाएँ कान के पीछे छींक हो तो गाड़ी वा मकान का भोग मिलता है और (८) बायें नेत्र के आगे छींक हो तो सर्वत्र और स्वार्थ लाभ मिलता है।
ये आठ प्रकार के छींक का फल है।
(१) पूर्व दिशा की छींक-- मृत्यु की सूचक है।
(२) आग्नेय कोण की छींक--शोक का सूचक है।
(३) दक्षिण दिशा की छींक-हानि की सूचक है।
(४) नैऋत्य कोण की छींक--कष्ट का सूचक है।
(५) पश्चिम की दिशा की छींक--मिष्ठान प्राप्ति का सूचक है।
(६) वायव्य कोण की छींक--धन-सम्पदा प्राप्ति का सूचक।
(७) उत्तर दिशा की छींक--कलह का सूचक।
(८) ईशान कोण की छींक-- धनागम का सूचक।
(९) आाकाश (ऊपर) की छींक--सर्व शत्रु नाश का सूचक।
(१०) पाताल (नीचे) की छींक-- सर्व सम्पदा प्राप्ति का सूचक।
ये दस दिशाओं में होने वाले छींक का फल है।
किस समय छींक शुभ और किस समय छींक अशुभ----
(१) नया वस्त्र पहनते समय की छींक---
शुभ होती है।
(२) स्नान के अंत की छींक--अशुभ होती है। पुनः स्नान कर लेना चाहिए।
(३) रोगी का हाल-चाल पूछते समय (पूछने वाले) की छींक--रोगी ठीक हो जाएगा।
(४) डाक्टर को बुलाते समय(बुलाने वाले) की छींक-- रोगी ठीक नहीं होगा।
(५) इलाज करते समय डाक्टर की छींक -- रोगी ठीक हो जाएगा।
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