(45) भारतीय सामुद्रिक शास्त्र के कुछ सिद्ध योग--

(1) त्रिकालज्ञ योग---
भाग्य (ऊर्ध्व) रेखा मणिबन्ध से उठकर 
मध्यमा के प्रथम पर्व तक ‌जाए, तो व्यक्ति त्रिकालज्ञ होता है।
(2) भक्ति योग---
दो हृदय रेखाएँ हों और करतल दीर्घ हो तथा पुष्ट हो तो व्यक्ति ईश्वर का भक्त होता है और भविष्य का ज्ञाता होता है।
(3) श्रेष्ठ पद प्राप्ति योग--
यदि कोई रेखा अनामिका के प्रथम पर्व से तीसरे पर्व तक जाए, तो व्यक्ति सर्व श्रेष्ठ पद प्राप्त करता है।
(4) पर सम्पत्ति लाभ योग---
जीवन रेखा अच्छी हो, सूर्य पर्वत उठा हुआ हो, सूर्य रेखा और भाग्य रेखा अच्छी हो, तो व्यक्ति दूसरे की सम्पत्ति प्राप्त करता है।
(5) विद्या योग--
 बुध, वृहस्पति और सूर्यपर्वत उठा हुआ हो। जीवन रेखा से कोई रेखा निकलकर वृहस्पति पर्वत तक जाए तो व्यक्ति विद्या प्राप्त करके  प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।
(6) दीर्घायु योग---
हाथ की उँगलियाँ लम्बी हो, हृदय रेखा बुध पर्वत से वृहस्पति पर्वत तक स्पष्ट और अखण्ड हो, तो व्यक्ति दीर्घायु होता है।
(7) मध्यायु योग--
हाथ की उँगलियाँ मध्यम हों, हृदय रेखा बुध पर्वत से शनि पर्वत तक अखण्ड हो, तो व्यक्ति मध्यम आयु का होता है।
(8) अल्पायु योग---
उँगलियाँ छोटी हों, टेढ़ी और भद्दी हों, हृदय रेखा बुध पर्वत से सूर्य पर्वत तक जाए, तो व्यक्ति अल्पायु होता है।
(9) द्रव्य नाश योग---
शुक्र पर्वत से छोटी-छोटी रेखाएँ निकलकर जीवन रेखा और भाग्य रेखा को काटती हुयी उच्च मंगल पर्वत (बुध पर्वत के नीचे) तक जाए, तो व्यक्ति स्वतः अपने धन का नाश करता है।
(10) कारावास योग--- 
शुक्र पर्वत और मंगल पर्वत पर चतुष्कोण चिह्न हो, और हाथ की कोई उँगली चार पर्वों से युक्त हो, तो व्यक्ति को कारावास मिलता है।
(11) प्राण दण्ड योग--
शनि पर्वत पर और मध्यमा उँगली के तृतीय पर्व पर नक्षत्र हो अथवा मस्तिष्क रेखा शनि पर्वत के नीचे टूटी हो तो व्यक्ति को प्राणदण्ड मिलता है।
(12) आत्महत्या योग--
भाग्य रेखा के प्रारम्भ में और चन्द्र पर्वत पर नक्षत्र का चिह्न हो तथा मंगल पर्वत (बुध पर्वत के नीचे) पर क्रास अथवा जाल का चिह्न  हो, तो व्यक्ति आत्महत्या करता है।
(13) अकालमृत्यु का योग---
भाग्य रेखा के पास हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा के बीच में क्रास चिह्न हो,
अथवा रेखा टूटी हो या छोटी-छोटी रेखाओं से कटी हो तो व्यक्ति की अकालमृत्यु होती है।
(14) तीर्थ मृत्यु योग---
चन्द्र पर्वत और वृहस्पति पर्वत उठे हुए हों तथा शनि पर्वत पर कमल का चिह्न हो, तो व्यक्ति की मृत्यु किसी तीर्थस्थान में होती है।
(15) जल मग्न योग--
सभी उँगलियों के तीसरे पर्व में यव चिह्न हो तो व्यक्ति दुराचारी होता है और उसकी मृत्यु जल में डूबकर होती है।
(16) माता-पिता का मृत्यु योग--
भाग्य रेखा के आरम्भ में द्वीप पर त्रिकोण हो, तो व्यक्ति बाल्यावस्था में ही अपने माँ-बाप को खो देता है।
(17) भाग्योदय योग-- मणिबन्ध वलय के ऊपर क्रास चिह्न हो तथा भाग्य रेखा पुष्ट हो, तो व्यक्ति भाग्यशाली होता है।
(18) विवाह योग--जितनी विवाह रेखाएँ सुन्दर, समान्तर और पुष्ट होती हैं, व्यक्ति के उतने विवाह होते हैं अथवा प्रेम सम्बन्ध होते हैं।
(19) विवाह में धन प्राप्ति योग-- 
वृहस्पति पर्वत पर नक्षत्र का चिह्न हो, तो व्यक्ति विवाह नें बहुत धन प्राप्त करता है। अथवा विवाह रेखा सूर्य पर्वत पर पहुँच जाए, तो व्यक्ति का विवाह उत्तम कुल में होता है और बहुत धन प्राप्त करता है।
(20) श्रेष्ठ दाम्पत्य जीवन योग--
मस्तिष्क और जीवन रेखा अलग-अलग हों, तो व्यक्ति का दाम्पत्य जीवन सुखी नहीं होता है। दोनो रेखाएँ आपस में मिली हों, सुन्दर‌ हों, तो दाम्पत्य जीवन सुखी होता है।


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