(26) स्वास्थ्य रेखा का न होना शुभ होता है।

       ---------बुध पर्वत---
बुध रेखा को स्वास्थ्य रेखा, आरोग्य रेखा, अथवा लाईन आफ हेल्थ या लाईन आफ जुपिटर भी कहते हैं। यह बुध पर्वत से निकलकर जीवन रेखा की ओर बढ़ती है। हाथ में स्वास्थ्य रेखा का न होना शुभ होता है।
जब स्वास्थ्य रेखा जीवन रेखा से मिलती है, यह व्यक्ति के मृत्यु का समय होता है। स्वास्थ्य रेखा का सम्बन्ध स्नायु मणल और मस्तिष्क दोनों से होता है। इस रेखा में परिवर्तन होता रहता है जब
यह अधिक गहरी होती है तो यह खराब स्वास्थ्य की ओर संकेत करती हैं, और जब स्वास्थ्य ठीक हो जाता है तब यह
रेखा लुप्त हो जाती है। जब व्यक्ति के स्नायु मण्डल में खराबी आती है तब यह रेखा गहरी हो जाती है। यदि स्वास्थ्य रेखा नीचे की ओर जाती है तो ठीक है  और यदि जीवन रेखा की ओर बढ़े अथवा इसकी कोई शाखा निकलकर जीवन रेखा से मिले तो व्यक्ति रोगी होता है। जब स्वास्थ्य रेखा हृदय रेखा से आरंभ होकर जीवन रेखा से आकर मिलती है तब व्यक्ति हृदय का रोगी होता है।
जब नाखून छोटे और गोल हों और उनमें चन्द्रमा न हो तथा स्वास्थ्य रेखा गहरी हो तो यह हृदय की दुर्बलता का प्रतीक है। नाखून लम्बे और बादाम के समान हों तो व्यक्ति फेफड़े का रोगी होता है। यदि नाखून सपाट और सीप के आकार का है तथा स्वास्थ्य रेखा गहरी है तो व्यक्ति लकवा का रोगी होता है। यदि स्वास्थ्य रेखा टेढ़ी-मेढ़ी और पीले रंग की है तो व्यक्ति पित्त का रोगी तथा लीवर का रोगी होता है। 
यदि स्वास्थ्य रेखा गहरी है और हृदय रेखा को पार करके मस्तिष्क रेखा से मिलती है तो मस्तिष्क ज्वर होता है।
यदि स्वास्थ्य रेखा नीचे की ओर जाती है तो व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब रहता है परन्तु व्यक्ति में रोगों से लड़ने की क्षमता होती है। यदि जीवन रेखा जंजीराकार है और स्वास्थ्य रेखा गहरी है तो व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब बना रहता है। यदि चन्द्र पर्वत विकसित और उठा हुआ है और स्वास्थ्य रेखा इस पर अंकित है तो व्यक्ति समुद्री यात्राएँ करता है। यदि ‌स्वास्थ्य रेखा छोटे-छोटे टुकड़ों को रूप में है तो व्यक्ति का पाचन ठीक नहीं रहता है। जब स्वास्थ्य रेखा मस्तिष्क रेखा को काटकर क्रास‌ का चिह्न बनाए तो व्यक्ति रहस्य विद्या (निगूढ़ विद्या) की
योग्यता प्राप्त करता है।
यदि स्वास्थ्य रेखा पर नक्षत्र का चिह्न है तो व्यक्ति में सन्तान उत्पन्न करने की क्षमता नहीं होती है। जब हथेली में सूर्य रेखा नहीं होती है, भाग्य रेखा कटी-फटी होती है और स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप का चिह्न होता है तो व्यक्ति दीवालिया हो जाता ‌है। स्वास्थ्य रेखा से निकलती हुयी शाखाएँ रोगों को प्रकट करती है।
यदि स्वास्थ्य रेखा हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा को पार करके आगे चली जाए और लालिमा लिए हुए हो तो व्यक्ति मूर्छा, मिरगी, पागलपन आदि 
मानसिक रोगों से त्रस्त रहता है। यदि
स्वास्थ्य रेखा पर लाल धब्बे हों तो व्यक्ति वात ज्वर का रोगी होता है। यदि स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप का चिह्न है तो व्यक्ति क्षय (टी०बी०) का रोगी होता है।

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