(25) सूर्य रेखा पर त्रिभुज व्यक्ति को अन्तरराष्ट्रीय लेखक बना देता है।

सूर्य रेखा- इसे विद्या रेखा, यश रेखा, प्रतिभा रेखा, सौभाग्य रेखा, सफलता रेखा अथवा लाइन आफ सन भी कहते हैं। यह हथेली की जड़ में से निकलकर अनामिका उँगली की ओर सूर्य पर्वत की ओर जाती है। अकेली भाग्य रेखा, कितनी ही अच्छी क्यों न हो, शुभ फल नहीं दे सकती, यदि स्पष्ट सूर्य रेखा न‌ हो। यदि व्यक्ति की हथेली में सूर्य रेखा
प्रबल और स्पष्ट रूप से अंकित है तो सफलता अवश्य मिलती है, चाहे भाग्य रेखा और मस्तिष्क रेखा निर्बल ही क्यों न हो।
सूर्य रेखा निम्नलिखित स्थानों से आरम्भ हो सकती है---जीवन रेखा से, भाग्य रेखा से, मस्तिष्क रेखा से, हृदय रेखा से, मंगल पर्वत से, चन्द्र पर्वत से अथवा सूर्य पर्वत पर स्वतंत्र रेखा के रूप में।
यदि व्यक्ति की हथेली में सूर्य रेखा जीवन रेखा से आरंभ होती है तो व्यक्ति
जिस काम में लगा हुआ होता है, उसमें वह सफल होता है। जब सूर्य रेखा भाग्य रेखा से आरंभ होती है तो व्यक्ति को स्वयं के प्रयत्नों से और परिश्रम से सफलता मिलती है। जब सूर्य रेखा मस्तिष्क रेखा से आरंभ होती है तो व्यक्ति को सफलता उसके मानसिक प्रयत्नों से और उसकी बौद्धिक क्षमता से 35 पैंतीस वर्ष की आयु के बाद मिलती है। जब सूर्य रेखा हृदय रेखा से आरंभ होती है तो व्यक्ति को सफलता
प्रेम की गतिविधियों से जीवन के अंतिम भाग अर्थात 50 वर्ष की आयु के बाद मिलती है, वृद्धावस्था अत्यन्त आनन्द पूर्वक बीतता है तथा उसका वैवाहिक
जीवन सुखी रहता है। जब सूर्य रेखा हृदय रेखा से ऊपर अर्थात् सूर्य पर्वत पर स्थित होती है तो व्यक्ति को सफलता उसके जीवन के अंतिम समय में मिलती है। जब सूर्य रेखा मंगल पर्वत से आरंभ होती है तो व्यक्ति को सफलता संघर्ष और कठिनाइयों के बाद मिलती है। जब सूर्य रेखा चन्द्र पर्वत से आरंभ होती है तो व्यक्ति को सफलता दूसरों के सहयोग से मिलती है। इस तरह की सूर्य रेखा वाले  व्यक्ति नेता, अभिनेता, संगीतकार अथवा कलाकार होते हैं।
जब सूर्य की उँगली तर्जनी से बड़ी होती है तब व्यक्ति में जुए की आदत बन जाती है। यदि सूर्य रेखा स्पष्ट है तो 
व्यक्ति को जुए में लाभ मिलता है।
जब व्यक्ति के हाथ की हथेली नुकीली हो तथा उँगलियाँ  निकली हों और सूर्य रेखा प्रबल हो तो व्यक्ति कला, नाट्य एवं संगीत क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। बहुत नुकीली उँगलियाँ और पतले 
कोमल हाथों में सूर्य रेखा भौतिक सफलता की सूचक नहीं होती है। सूर्य रेखा वाले व्यक्ति को वही वस्तु प्रिय होती है, वही वातावरण प्रिय होता है जो
सुन्दर हो। जिसके हाथ में सूर्य रेखा नहीं
होती है, वे जिस कमरे में रहते हैं, उसे भी साफ- सुथरा नहीं रखते हैं। 
जब सूर्य पर्वत पर बहुत सी सूर्य रेखाएँ
होती हैं तो व्यक्ति‌ की विचार धारा अनेकों क्षेत्रों से सम्बन्ध रखती है, ऐसे लोग एक क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ते इसलिए इनके आगे बढ़ने की सम्भावना
नहीं रहती है, फिर भी यदि दो या तीन
सूर्य रेखाएँ सूर्य पर्वत पर समानान्तर 
स्थित हैं तो शुभ है और वह दो-तीन क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करता है।
सूर्य रेखा पर द्वीप का चिह्न सफलता को नष्ट करता है और अपमानित करता है। सूर्य रेखा पर नक्षत्र का चिह्न है तो शुभ और सौभाग्य का प्रतीक होता है।
वर्ग का चिह्न सुरक्षा का सूचक है। क्रास का चिह्न अशुभ होता है। यदि हथेली में गड्ढा है तो अच्छी सूर्य रेखा का भी प्रभाव समाप्त हो जाता है। हाथ कितना ही अच्छा क्यों न हो, रेखाएँ बहुत प्रबल हों, यदि सूर्य रेखा नहीं है तो व्यक्ति का जीवन अँधेरे में रहेगा और सफलता का प्रकाश उसके जीवन में कभी नहीं आ सकता है। सूर्य रेखा पर क्रास उन्नति में बाधक होता है। काला तिल भी अशुभ होता है। त्रिभुज से लेखन में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति मिलती है।


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