(20) मस्तक रेखा का वृत्त पागल बना देता है-

मस्तक रेखा (Mental Line or Head Line)--इसे मस्तिष्क रेखा, धन रेखा, मातृ रेखा, शीर्ष रेखा अथवा ज्ञान रेखा भी कहते हैं। 
मस्तक रेखा का विकास एक सा नहीं रहता है। विकास में कभी-कभी वृद्धि होती है इसलिए मस्तक रेखा पर इस विकास क्रिया का प्रभाव पड़ता है। मस्तक रेखा तीन प्रकार से प्रारम्भ हो सकती है। (१) जीवन रेखा के अन्दर से
(२) जीवन रेखा से जुड़कर (३) जीवन रेखा के बाहर से।
(१) जब जीवन रेखा के अन्दर से मस्तक रेखा निकलती है तो ऐसा व्यक्ति अपनी भावनाओं पर नियन्त्रण नहीं रख पाता है। छोटी-छोटी बात पर उत्तेजित हो जाता है और अपना आपा खो बैठता है। यदि ऐसी मस्तिष्क ‌रेखा हथेली में आगे बढ़कर सीधी हो जाए तो व्यक्ति कुछ समय बाद अपने आवेश पर नियन्त्रण पा लेता है और यदि अन्त में 
यह चन्द्र क्षेत्र की ओर मुड़ जाए तो स्मरण शक्ति में कमी आती है। यदि मस्तिष्क रेखा निर्बल है और इसमें से 
सूक्ष्म रेखाएँ रेखाएँ निकली हुई हैं, तो व्यक्ति में मस्तिष्क विकार आ जाता है 
और जीवन अनियंत्रित हो जाता है।
   जब मस्तिष्क रेखा आरम्भ में जीवन 
रेखा से जुड़ी हुई होती है तो ऐसा व्यक्ति अत्यन्त भावुक होता है। आत्म विश्वास की कमी होती है यदि इस प्रकार की रेखा नीचे की ओर मुड़ जाए तो भावुकता और भी अधिक बढ़ जाती है।
यदि मस्तिष्क रेखा चन्द्र पर्वत पर झुक कर चली आती है तो व्यक्ति अस्थिर स्वभाव का बन जाता है। सनकी हो जाता है। मन में तरंग उठी तो उसी काम में लग‌ गया। ऐसा व्यक्ति कभी सफल नहीं होता है। यदि मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा से अलग होती है और दोनों के बीच में फासला कम होता है तो शुभ होता है। ऐसा व्यक्ति स्वतंत्र विचारों वाला होता है। शीघ्र निर्णय लेने की  क्षमता होती है और अपना जीवन ठीक प्रकार से चलाता है। यदि यह रेखा हथेली में सीधी चली गई है तो व्यक्ति दूसरों पर प्रभाव रखने वाला होता है और यदि यह समाजिक जीवन में भाग लेता है तो सफल रहता है, ऐसे व्यक्तियों
की विचार शक्ति बहुत तीव्र होती है और
कठिन समस्या का भी हल तुरन्त निकाल लेते हैं। यदि यह रेखा सीधी होने के बजाय नीचे की ओर मुड़ जाती है तो व्यक्ति अनिश्चित मन का हो जाता है। तरंगी हो जाता है। तरंग उठी तो काम किया, तरंग कम हुयी तो काम छोड़ दिया। ऐसा व्यक्ति असफल होता है। जिसके हाथ में इस प्रकार की रेखा अन्त में कुछ ऊपर की ओर उठती है अथवा दूसरे मंगल के क्षेत्र में प्रवेश करके ऊपर की ओर उठती है तो ऐसा व्यक्ति नेता होता है और जन आन्दोलनों को चलाने वाला होता है। ये अपने लक्ष्य
की प्राप्ति के लिए अपना घर-बार, अपना सर्वस्व बलिदान कर देने के लिए तत्पर रहते हैं।
जब मस्तिष्क रेखा आरम्भ में जीवन रेखा से अधिक फासले पर होती है तब
व्यक्ति में शक्ति और सतर्कता की बहुत कमी होती है। जल्दबाजी का स्वभाव होता है। ऐसा व्यक्ति क्रम से अपना काम नहीं निपटा पाता है। यह ऐसा कार्य करता है जिससे बदनाम हो जाता है। ऐसा व्यक्ति अपनी योजनाओं को बदलता रहता है। बेचैनी और व्याकुलता
इतनी बढ़ जाती है कि उसे नींद भी नहीं आती है। यदि ऐसे मस्तिष्क रेखा पर द्वीप का चिह्न है तो वह पागल हो सकता है और उत्तेजित होकर किसी की हत्या भी कर सकता है। मस्तिष्क रेखा
शुभ वह है जो जीवन रेखा से अधिक फासले पर न हो अथवा वृहस्पति पर्वत
से प्रारम्भ हो या उसकी एक रेखा वृहस्पति क्षेत्र पर पहुँचती हो।
मस्तिष्क रेखा यदि जंजीरा कार है तो 
यह मस्तिष्क की निर्बलता का प्रतीक है। मस्तिष्क रेखा करतल में बहुत ऊँचे पर हो तो ऐसा व्यक्ति आधे पागल के समान होता है। यदि जंजीराकार मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा से बहुत फासले पर हो तो ऐसे व्यक्ति के मस्तिष्क की विकृति लाइलाज होती है।
ऐसे व्यक्ति दूसरों के लिए खतरनाक बन जाते हैं। मस्तिष्क रेखा यदि जंजीराकार है और एकदम नीचे की ओर मुड़ जाती है तो ऐसे व्यक्ति अवसाद से ग्रस्त रहते हैं, इन्हें एकान्त पसन्द आता है और आत्महत्या करने का भय बना रहता है।
मस्तिष्क रेखा के द्वीपों का प्रभाव हम पर्वतों से भी निकालते हैं। यदि द्वीप 
वृहस्पति पर्वत के नीचे है तो ऐसा व्यक्ति
अपने जीवन के आरम्भ में बौद्धिक निर्बलता का शिकार रहता है। यदि मस्तिष्क रेखा पर द्वीप शनि पर्वत के नीचे है तो व्यक्ति सिर्फ उदासीनता का शिकार हो सकता है। यदि मस्तिष्क रेखा पर द्वीप चिह्न सूर्य पर्वत के नीचे है तो व्यक्ति की आँखें कमजोर हो सकती हैं। और यदि द्वीप का चिह्न गहरा है तो
व्यक्ति अंधा भी हो सकता है। यदि मस्तिष्क रेखा पर द्वीप चिह्न बुध पर्वत के नीचे है तो व्यक्ति के वृद्धावस्था में 
मस्तिष्क में निर्बलता और व्याकुलता 
बहुत बढ़ जाती है। यदि द्वीप चिह्न बहुत गहरा है तो मानसिक श्रम से अथवा चिन्ता से व्यक्ति पागल हो सकता है।
वृहस्पति पर्वत के नीचे के द्वीप का कुप्रभाव बारह वर्ष की अवस्था तक रहता है। शनि पर्वत के नीचे के द्वीप का प्रभाव बयालिस वर्ष तक रहता है। सूर्य
पर्वत के नीचे के द्वीप का प्रभाव बासठ वर्ष तक तथा बुध पर्वत के नीचे के द्वीप चिह्न का प्रभाव नब्बे वर्ष तक होता है।
मस्तिष्क रेखा पर क्रास का चिह्न सिर की चोट का प्रतीक है। यदि वृहस्पति पर्वत के नीचे है तो क्रूरता से शासन करने के कारण व्यक्ति के सिर पर आघात किया जाएगा। यदि शनि पर्वत के नीचे है तो विश्वासघात से सिर पर आघात किया जाएगा। पशु द्वारा भी आघात किया जा सकता है। यदि सूर्य पर्वत के नीचे है तो अचानक गिर जाने से सिर पर चोट लगेगी। यदि बुध पर्वत के नीचे है तो किसी व्यवसायिक कार्य
में लगे रहने के कारण सिर में चोट लगेगी। मस्तिष्क रेखा पर काला तिल 
मस्तिष्क सम्बन्धी बीमारी का प्रतीक है।
सिर पर भारी चोट भी लग सकती है। वर्ग शुभ है। यह मस्तिष्क सम्बन्धी बीमारी से बचाव करता है। त्रिभुज का चिह्न कुशाग्र बुद्धि का प्रतीक है। श्रेष्ठ
शिक्षा का परिचायक है। नक्षत्र का चिह्न 
कुंठित बुद्धि का प्रतीक है। वृत्त मस्तिष्क सम्बन्धी बीमारी को दिखाता है। दो मस्तिष्क रेखाएँ स्पष्ट रूप से अलग-अलग हों तो व्यक्ति दो स्वभाव का होता है। प्राचीन निगूढ़ शास्त्रियों का मत है कि ऐसे व्यक्ति को विरासत में बहुत धन और सम्पत्ति प्राप्त होती है।
जब कि कीरो के अनुसार ऐसा व्यक्ति धन-धान्य से सम्पन्न तो होता है परन्तु यह धन व्यक्ति अपनी बौद्धिक क्षमता से इकट्ठा करता है।

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