(19) जीवन रेखा का तिल टी०बी० की बीमारी देता है--

जीवन रेखा (Life Line) ---------    
जीवन रेखा वह रेखा है जो अँगूठे के मूल स्थान पर स्थित शुक्र को चारों ओर 
से घेरती है। इसे पितृ रेखा, आयु रेखा, 
गोत्र रेखा अथवा कुल रेखा भी कहते हैं। निर्दोष जीवन रेखा वह होती है, जो लम्बी हो, स्पष्ट हो और कहीं भी टूटी-फूटी न हो। इस तरह की जीवन रेखा वाला व्यक्ति दीर्घायु , जीवन शक्ति से पूर्ण, सशक्त शरीर वाला और निरोगी होता है। ऐसे व्यक्ति का पाचन बिल्कुल ठीक रहता है। यदि जीवन रेखा छोटे-छोटे टुकड़ों से बनी है अथवा जंजीरा कार है तो व्यक्ति का पाचन खराब रहेगा और जीवन शक्ति की कमी होगी।
            कुछ हाथों में जीवन रेखा चौड़ी
और छिछली सतह के ऊपर बनी होती है, यह सामान्य स्वास्थ्य का प्रतीक है।
गहरी और पतली रेखा अधिक गुणकारी होती है। डाकू, चोर, व्यभिचारी और ‌असामाजिक‌ तत्वों की जीवन रेखा चौड़ी और मोटी लकीर लिए होगी। गहरी जीवन रेखा वाला व्यक्ति साहसी, सहनशक्ति वाला तथा इच्छा शक्ति वाला होता है। चौड़ी रेखा मांसपेशियों की मजबूती तथा गहरी इच्छाशक्ति की मजबूती को प्रकट करता है। जंजीरा कार जीवन रेखा निर्बल स्वास्थ्य का प्रतीक है, विशेषकर जब हाथ कोमल हो। कठोर हाथ वाले व्यक्ति पर जंजीरा
कार जीवन रेखा कम प्रभाव डाल पाती है। जब जीवन रेखा शुक्र क्षेत्र के कम परिधि को घेरती है अर्थात् संकीर्ण होती है तो शरीर निर्बल होता है और यदि अधिक परिधि को घेरती है अर्थात् यह घेरा बड़ा होता है तब शरीर बलवान होता है। जिसका शुक्र क्षेत्र बड़ा होता है वह कामी होता है। प्रेम करने की कला में पूर्ण होता है। स्वभाव रोमांटिक होता है। यदि जीवन रेखा अपने आरम्भ में 
वृहस्पति पर्वत की ओर ऊपर उठ जाती है तब व्यक्ति महत्वाकांक्षी होता है। जब
जीवन रेखा अपने आरम्भ में मंगल पर्वत की ओर नीचे झुक जाती है तो व्यक्ति का स्वभाव तेज होता है और वह स्वयं पर नियंत्रण नहीं रख पाता है। वह महत्वाकांक्षी नहीं होता है, झगड़ालू और अनुशासन हीन होता है। जब जीवन रेखा से कई रेखाएँ ऊपर उठती हुयी निकलती हैं तब व्यक्ति जीवन के उस भाग में अपने भाग्य को सँवारने का प्रयत्न करता है। जब ये रेखाएँ उठकर वृहस्पति पर्वत की ओर जाती हैं तब
व्यक्ति के अन्दर उन्नति करने की आकाँक्षा उत्पन्न होती है। जब कोई रेखा
जीवन रेखा से उठकर मस्तिष्क रेखा पर रुक जाती है तब व्यक्ति अपनी बौद्धिक गलती से आगे बढ़ने से रुक जाता है। जब जीवन रेखा से उठी हुई रेखा हृदय रेखा पर‌ जाकर रुक जाती है, तब व्यक्ति को मोह अथवा प्रेम के कारण असफलता मिलती है। यदि उठती हुई रेखाएँ भाग्य रेखा पर जाकर रुक जाती है तो उस उम्र में व्यक्ति अपने
भाग्य को सँवारने का प्रयत्न करता है। यह शुभ लक्षण है। यदि उठती हुई कोई रेखा भाग्य रेखा के निकट पहुँचकर शनि पर्वत की ओर मुड़ जाती है तो दोहरी भाग्य रेखा समझना चाहिए।
   जीवन रेखा पर क्रास मरणांतक कष्ट देता है(जिस उम्र पर हो)। काला तिल 
टी० बी० की बीमारी की ओर संकेत करता है। द्वीप वर्ण संकर होने का प्रतीक है। वर्ग मरणांतक कष्ट से बचाता है। नक्षत्र अशुभ है, यह आकस्मिक मृत्यु की ओर संकेत करता है। वृत्त दृष्टि की कमज़ोरी दिखाता है।(जीवन रेखा को ऊपर से नीचे तक सौ बराबर भागों 
में बाँटकर उपर्युक्त चिह्न की सही आयु निकाल लेते हैं।)

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