(18) नेपच्यून की जाली जलयान में मृत्यु देती है--
नेपच्यून(वरुण) पर्वत--यह पर्वत चन्द्र पर्वत से ऊपर मस्तक रेखा तथा यूरेनस (हर्शल वा प्रजापति) के नीचे स्थित होता है। यदि नेपच्यून सामान्य रूप से विकसित उभरा हुआ रहता है तो व्यक्ति
अच्छा कलाकार, संगीतज्ञ, वाचक वा लेखक बन जाता है। यदि नेपच्यून पर्वत अत्याधिक विकसित अर्थात् उभरा हुआ हो तो व्यक्ति क्रूर स्वभाव वाला, शकी
अथवा सनकी बन जाता है। धँसा हुआ पर्वत अशुभ होता है।
इस पर्वत पर त्रिकोण अथवा त्रिभुज
विदेश में विवाह करवाता है। वर्ग उच्च
स्तरीय ख्याति दिलाता है। नक्षत्र जल यात्रा कराता है। एक रेखा सामाजिक
भावना को विकसित करता है। कई रेखाएँ सामाजिक दायित्व को पूरा कराने में सहायक होती हैं। क्रास से हत्या के भाव पैदा होते हैं। जाली जलयान में मृत्यु देती है। बिन्दु से व्यक्ति में विवेक बढ़ता है। कई कटती रेखाओं से निराशा के भाव पैदा होते हैं।
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