(22) विवाह रेखा का क्रास विवाह नहीं होने देता----
छोटी (कनिष्ठिका) उँगली को नीचे बुध क्षेत्र के किनारे पर जो आड़ी रेखाएँ होती हैं, वे विवाह रेखाएँ कहलाती हैं।
स्पष्ट और अच्छी बनी हुयी रेखाएँ ही विवाह को दर्शाती हैं। छोटी रेखाएँ केवल प्रेम सम्बन्ध अथवा विवाह की इच्छा को प्रकट करती हैं। यदि एक गहरी और स्पष्ट रेखा हृदय रेखा के निकट है तो कम आयु में विवाह हो जाता है और वैवाहिक जीवन सुखी रहता है। यदि विवाह रेखा नीचे की ओर झुक जाती है तो व्यक्ति के जीवन साथी की मृत्यु उससे पहले होती है। यदि यह रेखा ऊपर की ओर उठ जाए तो व्यक्ति
अविवाहित रहता है। यदि विवाह रेखा स्पष्ट हो परन्तु इनमें से अनेक छोटी-छोटी सूक्ष्म रेखाएँ निकलकर नीचे की ओर जाती हैं तो व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता है और वैवाहिक
जीवन कष्टमय होता है।
यदि विवाह रेखा अपने अन्त में नीचे की ओर झुकी हुयी हो और कोई रेखा अथवा क्रास इसे काटती हो तो किसी
दुर्घटना से अथवा अचानक बीमारी से
जीवन साथी की मृत्यु हो जाती है। परन्तु यह झुककर यदि हृदय रेखा से मिल जाए तो जीवन साथी की मृत्यु एक लम्बी बीमारी को बाद होती है।
यदि विवाह रेखा के आरम्भ में द्वीप चिह्न हो तो विवाह विलम्ब से होता है और यदि विवाह हो भी जाए तो पति-पत्नी का मिलन विलम्ब से होता है। यदि द्वीप चिह्न मध्य में हो तो वैवाहिक जीवन के मध्य में अलगाव हो जाएगा और यदि द्वीप चिह्न अन्त में है तो वैवाहिक सम्बन्ध का अन्त हो जाएगा।
यदि विवाह रेखा के अन्त में दो शाखाएँ बन जाएँ तो पति-पत्नी एक दूसरे से अलग रहेंगे। यदि एक रेखा हृदय रेखा से मिल जाए तो उनमें तलाक हो जाएगा। यदि विवाह रेखा जंजीराकार है तो व्यक्ति का वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं होता है। यदि विवाह रेखा स्पष्ट और अच्छी हो परन्तु बीच में टूटी हुयी हो तो सम्बन्ध टूट जाता है अथवा जीवन साथी की मृत्यु हो जाती है। यदि
विवाह रेखा स्वयं ऊपर उठकर अथवा कोई इसकी शाखा बढ़कर सूर्य रेखा से मिल जाए तो व्यक्ति का विवाह अत्यन्त धनवान अथवा प्रतिभाशाली जीवन साथी से होगा। यदि कोई रेखा बुध क्षेत्र के ऊपरी भाग से आकर विवाह रेखा में मिल जाए तो व्यक्ति के विवाह में बाधा
पड़ेगी फिर भी यदि विवाह रेखा सबल है तो बाधाएँ हट जाती हैं।
यदि विवाह रेखा के ऊपर एक पड़ी रेखा स्थित हो तो जीवन साथी पर किसी अन्य व्यक्ति का प्रभाव रहेगा।
शुक्र क्षेत्र से आने वाली रेखाएँ यदि विवाह रेखा के ऊपर तक आती हैं तो ये
सब रेखाएँ वैवाहिक जीवन में अवरोध उत्पन्न करती हैं। विवाह रेखा पर क्रास का चिह्न विवाह नहीं होने देता है। विवाह रेखा पर काला तिल विवाह में अड़चन पैदा करता है। द्वीप के चिह्न से
जीवन साथी की उस आयु में मृत्यु हो जाती है। वर्ग से विवाह में ससुराल से
धन प्राप्त होता है और सुशील पत्नी मिलती है। त्रिभुज और नक्षत्र से विवाह में बाधा पड़ती है। जीवन दुखी रहता है और आत्म हत्या की सम्भावना
रहती है। वृत्त होने पर व्यक्ति कुँवारा रहता है।
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