(8) शनि का क्रास अकाल मृत्यु देता है-

(२).शनि पर्वत(Mount of Saturn)--
शनि पर्वत मध्यमा उँगली के मूल स्थान के नीचे स्थित होता है। यदि शनि पूर्ण
रूप से उठा हुआ है तो व्यक्ति भाग्यशाली होता है। एकान्त प्रिय होता है तथा निरन्तर अपने लक्ष्य‌ की ओर बढ़ने वाला होता है। व्यक्ति अपने कार्यों में इतना डूबा रहता है कि उसको अपने घर गृहस्थी की भी चिन्ता नहीं होती है।
इनका स्वभाव चिड़चिड़ा होता है, संदेह शील होता है। ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ती जाती है ऐसा व्यक्ति रहस्यमय होता जाता है। ऐसे ही व्यक्ति
जादूगर, इंजीनियर, साहित्यकार, वैज्ञानिक एवं रसायन शास्त्री बनते हैं।
मितव्ययी होते हैं एवं अचल सम्पत्ति में अधिक विश्वास रखते हैं। यदि पर्वत अधिक उठा हुआ होता है तो ऐसे व्यक्ति
आत्महत्या कर लेते हैं। डाकू, ठग, लुटेरा बन जाते हैं। यदि पर्वत धँसा हुआ है ,इसका उभार सामान्य से भी कम है तो
व्यक्ति भाग्यवादी होता है। कार्यों में असफलता मिलती है। मित्रों की संख्या कम होती है। हठी होते हैं।
  शनि पर्वत पर त्रिभुज का चिह्न होने से रहस्यमय कार्यों में रुचि होती है। वर्ग होने पर अनिष्टों से बचाव होता है। वृत्त होने से शुभ कार्यों में रुचि होती‌है। नक्षत्र
होने पर हत्या करने की भावना बढ़ती है। एक खड़ी रेखा होने पर सौभाग्य में वृद्धि होती है। कई रेखाएँ होने पर जीवन में बाधाएँ आती हैं। क्रास होने पर अकाल मृत्यु होती है, नपुँसकता बढ़ती है। रहस्यमय दुर्घटना होती है।
शरीर पर कई बार घाव होते हैं। द्वीप का चिह्न कष्ट को बढ़ाने वाला होता है। जाली भाग्य क्षीणता कि प्रतीक है। बिन्दु होने पर अस्वाभाविक घटनाएँ होती हैं। काला तिल होने पर प्रेम में बदनामी होती है। पति-पत्नी में कलह बढ़ती है। इसमें से एक ‌के जलकर मर जाने की सम्भावना बढ़ती है।

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