(7) जुपिटर‌ का काला तिल कंगाल बना देता है

(१) गुरु पर्वत (Mount of Jupiter)-
यह पर्वत तर्जनी उँगली के मूल स्थान से नीचे स्थित होता है। जिस व्यक्ति के हाथ में गुरु (वृहस्पति) पर्वत उठा हुआ होता है, उस व्यक्ति में‌ महत्वाकांक्षा, आत्म गौरव. उत्साह, स्फूर्ति, न्याय प्रियता, बड़ा आदमी बनने की लालसा और शासन करने की भावना अधिक मात्रा में होती है और यदि यह पर्वत धँसा हुआ चपटा होता है तो उसमें धार्मिक भावना  और  बड़ों के प्रति श्रद्धा नहीं होती है। यदि यह पर्वत‌ अधिक उठा हुआ होता है तो वह व्यक्ति अहंकारी होता है और तानाशाह बन जाता है।
गुरु पर्वत पर त्रिभुज का चिह्न होने से 
राजनीतिक एवम् धार्मिक कार्यों में सफलता मिलती है। वर्ग होने पर मनुष्य
की कल्पनाएँ पूरी होती हैं। नक्षत्र होने पर व्यक्ति अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करता है। एक रेखा खड़ी होने पर कार्यों में सफलता मिलती है। कई खड़ी रेखाएँ होने पर साहित्य की ओर झुकाव होता है तथा भाग्य का उदय होता है। क्रास होने पर आदर्श विवाह होता है और ससुराल से खूब धन मिलता है, पत्नी खूब पढ़ी-लिखी होती है और पतिव्रता
होती है। ऐसा व्यक्ति सोच-समझ कर कार्य करने वाला होता है, परोपकारी, धनपति और धार्मिक विचार वाला होता है। द्वीप का चिह्न होने पर आत्मविश्वास
में कमी आती है। जाली होने से अशुभ.  होता है।  व्यक्ति अन्धविश्वासी होता है।
बिन्दु होने से सामाजिक प्रतिष्ठा में हानि होती है। काला तिल व्यक्ति को कंगाल बना देता है। विवाह में अड़चनें आती हैं  और बदनामी होती है।

Comments

Popular posts from this blog

उपनिषद की‌ सूक्तियाँ--

ऋगुवेद सूक्ति--(56) की व्याख्या

(2) Second Guru Angad Dev Ji Maharaj-- When Emperor Humayun pulled out his sword and try to attack on the neck of Guru Angad Dev Ji, his hand was paralyzed--Read more--