(5) नाखून पक्षाघात(लकवा) का संकेत देता है--

क्या कहता है ? आपका नाखून-----
नाखून चार प्रकार के होते हैं--(१) लम्बे (२) छोटे (३) चौड़े (४) सँकरे।
जब नाखून लम्बे होते हैं तो शारीरिक सबलता अच्छी नहीं होती है। ऐसे व्यक्ति को फेफड़े और छाती के विकार
होने का भय रहता है। जब नाखून के मूल से ऊपर उठती हुयी धारियाँ हों तो इन विकारों के बढ़ने की सम्भावना और बढ़ जाती है। यदि नाखून कुछ छोटे हैं
और इन पर धारियाँ हैं तो गले की बीमारी ब्रान्काइटिस, लेराइन नाइरिस
आदि के बढ़ने की सम्भावना होती है।
यदि नाखून नील वर्ण का दिखे तो शरीर में रक्तप्रवाह की कमी के लक्षण हैं।
छोटे नाखून हृदय की निर्बलता का  द्योतक है। नाखून में यदि चन्द्र बहुत छोटे हैं या नहीं हैं तब इसकी सम्भावना और अधिक बढ़ जाती है। यदि नाखून चपटे हैं तब स्नायु के विकार की सम्भावना होती है। यदि नाखून पर धारियाँ हैं तो इसकी सम्भावना और अधिक बढ़ जाती है। जब नाखूनों पर सफेद रंग के धब्बे हों तो यह कमजोरी
के लक्षण हैं। जब नाखून सफेद धब्बों से भरे हुए हों तो यह समझना चाहिए कि स्नायु मण्डल बहुत कमज़ोर हो गया है।
जब नाखून बहुत सँकरे हों तो वे रीढ़ की कमजोरी की ओर संकेत करते हैं, यदि वे बहुत मुड़े और पतले हों तो रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो गयी है ऐसा समझना चाहिए।
यदि नाखून बहुत चपटे हैं और अंत में मांस से चिपके न रहकर उखड़े हुए  दिखाई दें तो व्यक्ति को पक्षाघात हो
सकता है। यह खतरा और भी बढ़ जाता है यदि नाखून मूल स्थान पर सीप‌ के 
आकार के नुकीले दिखते हैं, जब इन पर चन्द्र का चिह्न नहीं होता है तथा नाखून नील वर्ण का दिखे तो ‌‌‌‌‌‌‌पक्षाघात की
सम्भावना और भी बढ़ जाती है।
बड़े आकार के चन्द्र से यह समझना चाहिए कि व्यक्ति के शरीर में रक्त प्रवाह
तेज है और हृदय मजबूत है। परन्तु यदि
चन्द्र बहुत बढ़े हों तो यह समझना चाहिए कि रक्त - प्रवाह बहुत तेज है।
हृदय की गति बढ़ गयी है। मस्तिष्क में रक्त वाहिनी फट सकती है। जब मृत्यु
निकट आती है तब चन्द्र‌ समाप्त हो जाते हैं, नाखून नीला या काला होने लगता है। एक मत के अनुसार नाखून 
छोटे और चौड़े हों तो व्यक्ति की 
आलोचनात्मक प्रवृत्ति होती है। ये लम्बे 
नाखून वालों के समान अव्यावहारिक नहीं होते हैं। इनमें निर्णय की क्षमता ‌होती है। अपनी बात के लिए ये घण्टों बहस करते रहते हैं, इन्हें क्रोध भी जल्दी आता है। जो बात इन्हें समझ में नहीं आती, उसे ये कतई नहीं मानते। यदि
चौड़ाई लम्बाई से अधिक है तो व्यक्ति
कलह प्रिय होता है। यदि किसी को नाखून चबाने कि आदत है तो यह उनकी बेचैनी दिखाती है और थोड़ी सी बात पर चिन्तित होने का स्वभाव दिखाता है।
गरुड़ पुराण के अनुसार जिनके नाखून छिलके के समान पीलापन लिए हुए 
शीघ्र टूटने वाले होते हैं तो ऐसे व्यक्ति
नपुंसक होते हैं। जिनके नाखून टेढ़े और धारी युक्त हों तो ऐसे व्यक्ति दरिद्र होते हैं। जिनके नाखूनों पर धब्बे हों, देखने में अच्छे न हों, ये दूसरों की सेवा करके अपना उदर-भरण करते हैं। गर्ग संहिता के अनुसार जिनके नाखून निर्मल और लालिमा लिए हुए हों, वे भाग्यशाली होते हैं। सामुद्रिक तिलक के अनुसार कछुए की पीठ की तरह कुछ ऊँचाई लिए हुए, मूँगे कि तरह लाल चिकने और चमकदार नाखून शुभ होते हैं। ऐसे व्यक्ति उच्च पद प्राप्त करते हैं।
विवेक विलास के अनुसार यदि नाखून कुछ चिकनाई और लालिमा लिए हुए हों
तो यह शुभ लक्षण है। यदि इनका रंग पीला है तो यह रोग का लक्षण है। यदि कुछ सफेदी लिए हुए हो तो वैराज्ञ के लक्षण हैं। यदि इन पर सफेद बिन्दु हैं
तो दुष्टता के लक्षण हैं, यदि शेर की तरह नाखून है तो क्रूरता के लक्षण हैं। जिनके नाखूनों में चमक न हो, टेढ़े और रूखे हों तो ये नीचता के लक्षण हैं।
स्कन्द पुराण के अनुसार यदि स्त्रियों के 
नाखून उँगली के अग्रभाग से कुछ आगे निकले हुए गुलाबी रंग के हों तो शुभ होता है। पीले, कान्तिहीन, नीचे धँसे हुए, सुन्दर रंग से युक्त न हों तो दरिद्रता का सूचक है। यदि नाखूनों पर‌ सफेद बिन्दु हैं तो व्यभिचार के लक्षण हैं।

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