(4) अपना अँगूठा देखकर खुद को पहचानिए--
अँगूठा देखकर खुद को पहचानिए----
अँगूठा व्यक्ति की स्वाभाविक इच्छाशक्ति का प्रतीक है। अँगूठा तीन गुणों का प्रतिनिधित्व करता है।(१) प्रेम (२) तर्क (३) इच्छाशक्ति। प्रेम का स्थान अँगूठे के मूल में होता है। इसको शुक्र पर्वत घेरे रहता है। दूसरे पर्व से तर्क का विचार करते हैं। और प्रथम पर्व इच्छा शक्ति का प्रतीक है। बड़े पर्व से गुणों की प्रधानता होती है जब कि छोटे पर्व से गुणों में कमी आती है।
अँगूठा दो प्रकार के होते हैं---लचकदार और दृढ़ जोड़ वाले। लचकदार अँगूठा
सरलता से पीछे की ओर मुड़ जाता है।
इस तरह अँगूठे वाले व्यक्ति में लचक होती है। ये खुले दिल वाले होते हैं।
परिस्थितियों के अनुकूल अपने को ढाल लेते हैं। ये उदार हृदय वाले होते हैं। ये देते अधिक हैं लेते कम हैं। अँगूठा जितना ही हथेली के निकट होगा, उतना ही ये अपना धन बचाने में समर्थ होंगे। ऐसे लोग कंजूस होते हैं।
दृढ़ जोड़ वाले अधिक दृढ़ स्वभाव के और स्थिर स्वभाव के होते हैं। जितना ही अँगूठे का प्रथम पर्व बड़ा होगा, उतनी ही उसकी इच्छा शक्ति प्रबल होगी। इस प्रकार के अँगूठे वाले व्यक्ति
सरलता से अपना मित्र नहीं बनाते जिसका अँगूठा छोटा, बेडौल, बेढंगा और मोटा होता है, वह असभ्य, उद्दण्ड
और क्रूर होता है, परन्तु जिसका अँगूठा सुन्दर और लम्बा है उसका बौद्धिक स्तर अच्छा, बढ़ा हुआ रहता है।
विवेक विलास के अनुसार अँगूठे के मूल में यव चिह्न हो तो विद्या, ख्याति और ऐश्वर्य प्राप्त होता है। यदि एक भी यव है तो वह प्रतिष्ठित होता है।
गदा के आकार का अँगूठा वह होता है जिसका अंत गदा के समान चौड़ा हो, इस प्रकार का अँगूठा रखने वाला व्यक्ति निम्न श्रेणी का होता है, निष्ठुर होता है, हठी होता है। ऐसे लोग प्रतिकूल परिस्थितियों में क्रोध में अन्धे हो जाते हैं। अपना नियंत्रण खो बैठते हैं। आवेश में आकर हत्या भी कर देते हैं। अधिकतर हत्यारों कि हथेली का अँगूठा गदा के आकार का ही होता है।
पतली कमर के आकार का अँगूठा रखने वाले व्यक्ति चालाकी और कूटनीति से अपना कार्य निकालते हैं।
अँगूठे का तीसरा पर्व जो प्रेम का प्रतीक
है, वास्तव में शुक्र पर्वत के नाम से जाना जाता है। यदि यह पर्वत लम्बा और विस्तृत है तो व्यक्ति प्रेमी होता है और यदि छोटा और मोटा है तो व्यक्ति
कामी होता है। यदि अँगूठे की बनावट
अच्छी है परन्तु हथेली के बिल्कुल निकट है तो व्यक्ति स्वतंत्र विचारों का
नहीं होता है। व्यक्ति स्वयं निर्णय लेने में
असमर्थ रहता है, उसे दूसरे से परामर्श
लेना पड़ता है। यदि हथेली से अँगूठा
अधिक कोण बनाता है तो ऐसा व्यक्ति
स्वतंत्र विचारों वाला होता है और स्वयं में निर्णय लेने की क्षमता होती है।
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