(3) उँगलियाँ हाथ की कुछ बताती हैं--

(२). ----- उँगलियाँ हाथ की----
पहली उंगली वृहस्पति उँगली है, इसे तर्जनी भी कहते हैं। दूसरी उँगली शनि उँगली है , इसे मध्यमा भी कहते हैं। तीसरी उँगली सूर्य उँगली है, इसे अनामिका या धनिष्ठा भी कहते हैं। चौथी उँगली बुध उँगली है, इसे कनिष्ठिका या कनिष्ठा भी कहते हैं। जब पहली उँगली लम्बी होती है तब व्यक्ति में शासन करने की प्रवृत्ति होती है। जब यह उँगली छोटी होती है तब व्यक्ति दायित्व से कतराता है। यदि यह उँगली टेढ़ी है तो व्यक्ति को सम्मान नहीं मिलता है। जब दूसरी उँगली लम्बी होती है तब व्यक्ति बुद्धिमान होता है, परन्तु एकान्तप्रिय होता है और अध्ययनशील
होता है। जब यह उँगली छोटी होती है तब व्यक्ति हल्के विचार का होता है,और विषय के प्रति गम्भीर नहीं होता है। यदि
यह उँगली टेढ़ी है तब व्यक्ति हिंसात्मक प्रवृत्ति का होता है। जब तीसरी उँगली लम्बी होती है तब व्यक्ति सुन्दरता का प्रेमी होता है। मान-प्रतिष्ठा अर्जित करने की आकांक्षा होती है। यदि उँगली छोटी है तो विघ्न-बाधाएँ आती हैं। यदि यह उँगली बहुत लम्बी है तो व्यक्ति कुख्यात होता है और इसमें येन-केन प्रकारेण धन अर्जित करने की लिप्सा होती है। सट्टे और जुए का शौकीन होता है। यदि उँगली टेढ़ी है तो वह अपनी कला का उपयोग गलत बातों के लिए करता है।
यदि चौथी उँगली लम्बी है तो व्यक्ति ‌का
मानसिक और बौद्धिक स्तर ऊँचा होता है। ऐसा व्यक्ति कई भाषाओं में दक्ष होता है। ओजस्वी वक्ता होता है। यदि यह उँगली छोटी है तो वह अपने विचारों को ठीक प्रकार से व्यक्त नहीं कर पाता है। यदि टेढ़ी है तो वह अपने बुद्धि का प्रयोग अनैतिक कार्यों को लिए करता है। उँगलियों का हथेली से लम्बा होना 
अच्छा होता है। ऐसा व्यक्ति अपनी बौद्धिक क्षमता का  उपयोग सही दिशा में करता है। यदि उँगलियाँ छोटी और ठूँठी हैं तो व्यक्ति सांसारिकता में बहुत विश्वास करता है। व्यक्ति में मानवीय प्रवृत्ति के स्थान पर पाशविक प्रवृत्ति की
वृद्धि होती‌ है। जब उँगली सीधी न होकर दूसरी उँगली की ओर झुकी होती है तब इस उँगली के गुण पर दूसरी उँगली के गुण का प्रभाव आ जाता ‌है। यदि प्रथम उँगली और अँगूठे में अन्तर अधिक है तो व्यक्ति स्वतंत्र विचारों का
होता है। यदि दूसरी और तीसरी उँगली
में अन्तर अधिक है तो व्यक्ति परिस्थितियों से नहीं घबड़ाता है और भविष्य से प्रति चिन्तित नहीं रहता है।
यदि तीसरी और चौथी उँगली के बीच
अन्तर अधिक होता है तो व्यक्ति स्वतंत्रता पूर्वक कार्य करता है और अपने कार्य में दूसरे का दखल सहन  नहीं करता है। 
यदि उँगलियाँ मुलायम हैं और पीछे की ओर झुकी हैं तो व्यक्ति खुले दिल का होता है और हर बात को समझ सकता है। यदि उँगलियाँ कठोर ‌हैं तो वह व्यक्ति हर काम को जाँच-परख कर योजनाबद्ध तरीके से करता है। यदि उँगलियाँ आगे की‌ ओर झुकी हैं तो व्यक्ति ‌सावधान रहता है और बात को सरलता से नहीं समझना चाहता है।
चिकने जोड़ वाली उँगलियों वाले व्यक्ति
में काम के प्रति उमंग होती है और काम जल्दी करने के लिए तैयार हो जाते हैं,
जबकि गाँठ वाली उँगलियों वाले व्यक्ति
को कार्य करने के निर्णय पर पहुँचने में विलम्ब लगता है।
यदि प्रथम उँगली दूसरी उँगली के बराबर है तो व्यक्ति में शासन करने की 
प्रबल इच्छा रहती है । यदि प्रथम उँगली
दूसरी उँगली से बड़ी है तो व्यक्ति तानाशाह होता है, यदि पहली उँगली 
लम्बाई में बहुत कम है तो व्यक्ति भीरु
होता है। यदि पहली उँगली तीसरी उँगली से बहुत बड़ी है तो व्यक्ति बहुत महत्वाकांक्षी होता है। यदि ये दोनों उँगलियाँ बराबर हैं तो यश और धन की
बहुत लालसा होती है। यदि पहली उँगली तीसरी उँगली से छोटी है तो व्यक्ति सन्तुष्ट रहता है। 
यदि दूसरी उँगली पहली उँगली से बहुत
बड़ी है तो व्यक्ति निराशावादी तथा दुखी
होता है। यदि दूसरी उँगली पहली उँगली
से छोटी है तो व्यक्ति पागल हो सकता है। यदि दूसरी उँगली तीसरी उँगली से बहुत बड़ी है तो व्यक्ति निराशावादी होता है। यदि दोनों उँगलियाँ बराबर हैं तो व्यक्ति‌ जुआ और सट्टे का शौकीन होता है। यदि दूसरी उँगली तीसरी उँगली से छोटी है तो व्यक्ति मूर्ख होता है। यदि दूसरी उँगली तीसरी उँगली से बड़ी है तो व्यक्ति कला और साहित्य का प्रेमी होता है। यदि तीसरी उँगली पहली उँगली से छोटी है तो व्यक्ति महत्वाकांक्षी होने के कारण अपने को योग्य समझता है। यदि तीसरी उँगली 
दूसरी उँगली से बहुत बड़ी है तो व्यक्ति
अपने व्यवसाय में बहुत अधिक‌ लाभ
उठाता है या बहुत अधिक घाटा उठाता है। यदि तीसरी उँगली दूसरी उँगली से छोटी है तो निराशावादी होने के कारण
सफलता नहीं मिलती है।
यदि तीसरी उँगली चौथी उँगली से बहुत
लम्बी है तो व्यक्ति कला, साहित्य, संगीत के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। यदि दोनो उँगलियाँ बराबर हैं तो व्यक्ति चतुर और चालाक होता है। यदि
चौथी उँगली पहली उँगली के बराबर है तो व्यक्ति राजनैतिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। यदि चौथी उँगली दूसरी
उँगली के बराबर‌ है तो व्यक्ति विज्ञान के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। यदि 
चौथी उँगली तीसरी उँगली के बराबर है तो व्यक्ति अनेक विषयों का ज्ञाता होता है। 
भविष्य पुराण के अनुसार यदि उँगलियाँ विरल हैं तो व्यक्ति दरिद्र होता है, और यदि एक दूसरे से मिली हुयी हैं तो व्यक्ति धनवान होता है।
गरुड़ पुराण के अनुसार उँगलियाँ सीधी हों तो आयु को बढ़ाती हैं, उँगलियाँ चपटी हों तो‌ व्यक्ति दूसरों की नौकरी करके उदर भरण करता है। उँगलियाँ
बहुत मोटी हों तो व्यक्ति निर्धन होता है।
पीछे की ओर झुकी हुयी हों तो व्यक्ति की मृत्यु शस्त्र से होती हैं। 
विवेक विलास के अनुसार उँगलियों के पर्व लम्बे हों और अंगूठे के मूल स्थान पर रेखाएँ हों तो व्यक्ति पुत्रवान, धनवान और दीर्घायु होता है। एक अन्य मत के अनुसार यदि तर्जनी और मध्यमा के बीच दरार हो तो जीवन के प्रथम भाग में धनहीनता होती है।  यदि मध्यमा और अनामिका के बीच में दरार है तो मध्य भाग में धनहीनता होती है। यदि अनामिका और कनिष्ठा के बीच में दरार होती है तो धनहीनता बुढ़ापा में होती है। यदि सब उँगलियों के बीच में दरार है तो जीवनभर धनहीनता रहती  है और यदि सभी उँगलियाँ सटी रहती हैं तो जीवन भर धन का सुख रहता है।
नारद संहिता के अनुसार अनामिका का 
मध्यपर्व पार करके कनिष्ठा आगे बढ़ जाए तो व्यक्ति सौ वर्ष जीता है। यदि
कनिष्ठा का अग्रभाग अनामिका‌ के मध्य
पर्व तक पहुँच जाए तो व्यक्ति अस्सी वर्ष तक जीता है, इससे कुछ कम हो तो सत्तर वर्ष और‌ यदि अनामिका के मध्य पर्व के मध्यम भाग तक पहुचे तो साठ वर्ष ही जीता है।
भविष्य पुराण के अनुसार जिन स्त्रियों की उँगलियाँ गोलाई लिए हुए बराबर पर्व वाली आगे से पतली, कोमल‌ त्वचा वाली, गाँठ रहित हो तो वह स्त्री सुख भोगती है।
स्कन्द पुराण के अनुसार वे स्त्रियाँ दुख भोगने वाली होती हैं जिनकी उँगलियों मैं तीन से अधिक पर्व हों,  उँगलियाँ सूखी और माँस रहित हों, बहुत लाल वर्ण की हों, बहुत छोटी हों, विरल हों, चपटी हों।
जिस स्त्री की उँगलियाँ बहुत छोटी हों और दोनों हाथों से अंजुली बनाते समय
उँगलियों के बीच में छिद्र रहे, वह‌ स्त्री अपने पति के घर को खाली कर देती है, अर्थात् समस्त अर्जित तथा संचित धन को खर्च कर देती है।

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