(2) आपकी हथेली क्या कहती है ?जानिए---

आपकी हथेली क्या कहती है-जानिए--  यह दिव्य संसार ईश्वर का बनाया हुआ है। इस संसार में मानव के आने- जाने  का क्रम अनादिकाल से चला आ रहा है। ये सभी मानव रूप, रंग और बनावट में भिन्न होते हैं और सब के विचार भी 
भिन्न होते हैं। बनावट के आधार पर हाथ सात प्रकार के होते हैं---
(१) निम्न श्रेणी का हाथ(Elementry)
(2) वर्गाकार हाथ(Square)
(3) चमसाकार हाथ(Stapulate)
(4) दार्शनिक हाथ(Philosophic)
(5) नुकीला या कलात्मक हाथ                                 (Conic orArtistic)
(६) बहुत नुकीला या आदर्श हाथ
                       (Phychic)
(7) मिश्रित हाथ(Mixed)
(१) निम्न श्रेणी का हाथ-- हथेली मोटी और खुरदरी होती है। उँगलियाँ छोटी और बेढंगी होती हैं। नाखून छोटे होते हैं। देखने में करतल बड़ा, मोटा और भारी होता है। अँगूठा छोटा और मोटा होता है। नाखून वाला पर्व भारी भरा हुआ और अधिकतर वर्गाकार होता है।
इस श्रेणी की हथेली वाले लोगों का झुकाव पाशविक वृत्ति की ओर अधिक
होता है। मानसिक और बौद्धिक क्षमता
कम होती है। भावावेश  पर नियंत्रण
बिल्कुल नहीं होता है। प्रेम, स्नेह और सुन्दरता की ओर आकर्षण की भावना 
नहीं होती है। ऐसे व्यक्ति हिंसक प्रवृत्ति
के होते हैं परन्तु साहसी नहीं होते हैं। ऐसे व्यक्ति चालाक ‌होते हैं परन्तु विवेकवान नहीं होते हैं। ऐसे व्यक्तियों का जीवन खाने,  पीने, सोने और मर जाने तक सीमित होता है।
(२) वर्गाकार हाथ-- हथेली के नीचे 
कलायी के पास वाला भाग तथा ऊपर
के उँगलियों के जड़ के पास वाला भाग
लगभग बराबर हो अर्थात्  हथेली की
लम्बाई और चौड़ाई बराबर हो तो ऐसे
हाथ वर्गाकार अथवा उपयोगी हाथ कहलाते हैं। ऐसे हाथ में नाखून भी छोटे
और वर्गाकार होते हैं। ऐसे व्यक्ति अनुशासन प्रिय होते हैं। झगड़ालू नहीं होते हैं, परन्तु दृढ़ निश्चयी होते हैं। ऐसे व्यक्ति काव्य और कला के प्रेमी नहीं होते हैं परन्तु सदैव उपयोगी कामों में लगे रहते हैं। ऐसे व्यक्ति अंध विश्वासी नहीं होते हैं परन्तु वास्तविकता को पसन्द करते हैं। ऐसे व्यक्ति हर बात को 
उपयोगिता और सांसारिक व्यवहार के 
दृष्टिकोण से देखते हैं। ऐसे लोगों के  आचरण में दृढ़ता होती है। इच्छा शक्ति प्रबल होती है। इन्हें अपना घर और घरेलू जीवन पसन्द होता है। ऐसे लोग 
अपने वचन पर दृढ़ रहते हैं। यदि हाथ वर्गाकार है और उँगलियाँ छोटी हैं तो ऐसे लोग हठी होते हैं, संकुचित स्वभाव वाले होते हैं। ऐसे लोग परिश्रम से धीरे-धीरे धन इकट्ठा करते हैं। ऐसे व्यक्ति कंजूस नहीं होते हैं, व्यावहारिक होते हैं।
वर्गाकार हाथ तथा लम्बी उँगलियों वाले
लोग बुद्धिमान होते हैं। रूढ़िवादी नहीं होते परन्तु तार्किक होते हैं। ये सदैव
विवेकपूर्ण कार्यों में लगे रहते हैं। वर्गाकार हाथ तथा गँठीली उँगलियों वाले लोग किसी कार्य को करने से पहले अति सूक्ष्मता से अर्थात् बहुत बारीकी से विचार करते हैं फिर उस कार्य को सम्पन्न करते हैं। वर्गाकार हाथ
और कुछ नुकीली उँगलियों वाले लोग 
साहित्यकार, संगीतकार, कवि और 
कलाकार होते हैं। ऐसे लोग अपनी योग्यता को व्यावहारिक रूप देने में सफल होते हैं। वर्गाकार और अत्यंत नुकीली उँगलियों वाले लोगों में कोई बुराई नहीं होती है, परन्तु ऐसे लोग मूडी और सनकी होते हैं, इसलिए इन्हें सफलता नहीं मिलती है। वर्गाकार और मिश्रित उगलियों  वाले लोगों की रुझान
एक विषय की ओर नहीं रहता है, उन्हें
 हर प्रकार के विषयों में अपने को संलग्न रखने में अच्छा लगता है, इसलिए ऐसे लोगों को कभी सफलता नहीं मिलती है।
(३) चमसाकार हाथ--
 जिस हथेली में उँगलियों का अग्र भाग
फैला हुआ होता है। हथेली में या तो कलाई के पास अथवा  उँगलियों के मूल स्थान के पास फैली हुयी होती है चमचा की तरह। जब फैलाव कलाई की ओर
अधिक होता है तब हथेली उँगलियों की तरफ कुछ नुकीली हो जाती है, यदि फैलाव उँगलियों के मूल स्थान की ओर
अधिक है तो हथेली कलाई की ओर कुछ नुकीली हो जाती है। यदि फैला हुआ हाथ सख्त और कठोर है तो व्यक्ति
अस्थिर बुद्धि वाला, व्याकुल और बेचैन
स्वभाव का होता है। यदि हाथ मुलायम
और लचीला है, तो स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है। ऐसे व्यक्ति
जोश में काम तो प्रारम्भ कर देते हैं परन्तु बाधा आने पर काम को बीच में ही छोड़  देते हैं। उँगलियों के मूल स्थान पर फैली हुई हथेली वाले लोगों में काम करने की प्रवृत्ति होती है तथा इनमें स्फूर्ति और क्षमता होती है। ऐसे लोग इंजीनियर और मेकैनिक स्वभाव वाले होते हैं। यदि उँगलियाँ सुविकसित हैं तो ऐसे लोग जिस क्षेत्र में कदम रखते हैं, शिखर पर पहुँचते हैं और अपना नाम भी करते हैं, वैज्ञानिक क्षेत्र में नये-नये अनुसंधान करते हैं। यदि हथेली का फैलाव उँगलियों के मूल स्थान पर अधिक है तो व्यक्ति आविष्कारक होता है। यदि फैलाव कलाई की तरफ अधिक है तो व्यक्ति का आविष्कारक स्वभाव
मानसिक क्षेत्र में अधिक होता है जैसे
साहित्यिक क्षेत्र अथवा अन्य वैचारिक
क्षेत्र में।
(४) दार्शनिक हाथ-- ऐसी हथेली अधिकतर लम्बी और नुकीली होती है।
उँगलियों की हड्डियाँ तथा जोड़ उभरे हुए और नाखून लम्बे होते हैं । इस प्रकार की हथेली व्यक्ति को दार्शनिक बनाती है। ऐसे व्यक्ति में बुद्धि और ज्ञान का महत्व धन से अधिक होता है। इनकी विचारधारा में रहस्यवाद छिपा रहता है।
सुख भोगने की अपेक्षा तत्व ज्ञान को प्राप्त करना इन्हें अधिक पसन्द होता है। मित्रता पूर्ण ढंग से लोगो से मिलते हैं, परन्तु किसी से उनकी घनिष्ठता नहीं बढ़ती। ऐसे व्यक्तियों के पास जो थोड़ा
बहुत धन होता है, उसे परोपकार कार्य में खर्च कर देते हैं। ऐसे हाथ में गँठीली उँगलियाँ हों तो व्यक्ति कोई महत्वपूर्ण 
कृति अपने पीछे छोड़ ‌जाता है। चिकनी
उँगलियों वाले लोग रहस्यमय‌ होते हैं।
उनकी गहराई को जान पाना कठिन होता है। यदि कोई इन्हें किसी प्रकार की चोट या हानि पहुँचाता है तो ये उसे कभी विस्मृत नहीं करते हैं और समय आने पर अवसर देखकर अपना बदला ले लेते हैं।
(५) नुकीला या कलात्मक हाथ---- साधारण लम्बाई-चौड़ाई की हथेली जिसकी उँगलियाँ जड़ में मोटी और छोरों में पतली होती हैं। इस प्रकार की हथेली वाले लोग उतावले, चंचल स्वभाव, बातूनी, भावुक और बहकावे
 में जल्दी आ जाते हैं। जरा सी घटना से बहुत अधिक प्रभावित होते हैं। थोड़ी सी लड़ाई में लड़ मरना और थोड़ी सी मित्रता में अपना सब कुछ लुटा देने की इनकी प्रवृत्ति होती है। काम करना और 
इसे बीच में ही छोड़ देना इनके स्वभाव में होता है। अगर उँगलियाँ सख्त हैं तो कला पूर्ण कार्यों में इन्हें सफलता मिलती है। व्यापार में धन कमाते हैं और चुने हुए आदमियों में गिने जाते हैं, किन्तु यदि उँगलियाँ पतली और ऐंठी हुयी हों तो ऐसी हथेली वाले लोग ईर्ष्यालु, धूर्त, झूँठे, छली, कपटी आदि विचारों से युक्त होते हैं। यदि हाथ बहुत अधिक मुलायम है तो ऐसे व्यक्ति लापरवाह होते हैं, कर्ज़
लेकर न लौटाना, विषय-वासना की ओर
अधिक आकर्षित रहना, मनोरंजन में अधिक रुचि रखना, हल्की बातें करना इनका स्वभाव होता है।
(६) बहुत नुकीला या आदर्श हाथ---
इस प्रकार की हथेली सबसे सुन्दर होती है परन्तु इस प्रकार की हथेली वाले लोग बहुत दुर्भाग्यशाली होते हैं। हाथों की उँगलियाँ लम्बी पतली और आगे से बहुत नुकीली और सुन्दर होती हैं। नाखून लम्बे बादाम के आकार के बहुत
आकर्षक होते हैं। कहा जाता है कि सबसे सुन्दर हथेली इसी कोटि की होती है, परन्तु कर्म के क्षेत्र में ऐसे लोग शून्य होते हैं। ऐसी हथेली वाले लोग परिश्रम नहीं कर सकते। ये सौंदर्य प्रिय, सुशील तथा नम्र और शान्त स्वभाव के होते हैं।
इनमें सांसारिक व्यावहारिकता नहीं होती है, इसलिए किसी ने सहानुभूति प्रकट की तो तुरन्त उस पर विश्वास कर लेना इनका स्वभाव होता है। ऐसे लोग
धार्मिक होते हैं, समय के पाबन्द बिल्कुल नहीं होते। इन हाथों को आदर्शवादी अथवा आध्यात्मिक हाथ भी कहते हैं। ऐसे व्यक्ति अंधविश्वासी होते हैं। तंत्र, मंत्र, सिद्धियाँ, सन्त- महात्मा की कृपा, ज्योतिष, जन्मपत्री, देवकृपा पर विश्वास रखते हैं।
(७) मिश्रित हाथ--इस प्रकार की हथेली में ऊपर वर्णित छः प्रकार की हथेलियों के लक्षण एक साथ दिखायी देते हैं। कुछ लक्षण किसी एक के और कुछ लक्षण दूसरों के होते हैं। उँगलियाँ भी अलग-अलग प्रकार की होती हैं। कोई नुकीली, कोई वर्गाकार, तो कोई चमसाकार होती हैं। ऐसे व्यक्ति अनेक गुणों से युक्त होते हैं, परन्तु किसी में कार्यपटुता नहीं होती है। यदि हथेली किसी एक प्रकार की और उँगलियाँ दूसरे प्रकार की हैं तो हथेली वाले गुणों का प्रभुत्व रहेगा। ऐसे लोग कई क्षेत्रों में दखल देते हैं, परन्तु किसी में भी पटु नहीं होते हैं। ऐसे व्यक्तियों को कहा जाता है---Jack of all trades but master of none.
       

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