--------इस संसार में भी सुख है------
जो लोग कहते हैं कि इस संसार में
दुख ही दुख है, वे झूठ बोलते हैं। सच तो यह है कि इस संसार में भी सुख है, जब हम सुन्दर वस्तुओं को देखते हैं। तो हमें सुख मिलता है। हम चाहते हैं कि वह सुन्दर वस्तु सदा के लिए हमारी आँखों के सामने रहे, और हम उसे देखते रहें। जब हम कर्णमनोहर संगीत को सुनते हैं तो हमें सुख मिलता है और हम चाहते हैं कि वह संगीत सदा के लिए हमारे कानों में बजता रहे, और हम उसे सुनते रहें। जब किसी अनुपम सुगंध की खुशबू मेरी नाक में आती है, तो हमें सुख मिलता है। हम चाहते हैं कि वह खुशबू सदा के लिए मेरी नाक में आती रहे और हम उसकी भीनी-भीनी खुशबू लेते रहें। जब हमारी जिह्वा को किसी वस्तु का स्वाद अच्छा लगता है तो हम चाहते हें वह वस्तु हमें खाने के लिए सदा मिलती रहे और हम उसका स्वाद लेते रहें। इसीतरह जब हमें किसी वस्तु का स्पर्श अच्छा लगता है तो हम चाहते हैं कि उस वस्तु का स्पर्श हमें सदा मिलता रहे और उसे हम अपने हल्के-हल्के हाथों से सहलाते रहें। परंतु उन अच्छी वस्तुओं के उपयोग में तुष्टिगुण ह्रास नियम लागू होता है। इसे उपयोगिता ह्रास नियम भी कहते हैं। इसे हम एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लिया आप बहुत भूखे हैं। पहली रोटी जब आप खाते हैं तो बहुत अच्छी लगती है। दूसरी रोटी उससे कुछ कम अच्छी लगती है। तीसरी रोटी दूसरी रोटी से भी कम अच्छी लगती है। चौथी रोटी न अच्छी लगती है और न खराब लगती है। पाँचवी रोटी बहुत खराब लगती है, और छठी रोटी खा लेने पर उल्टी होने लगती है। जिस रोटी को पाने के लिए आप तड़प रहे थे, उसी रोटी को खा लेने से आपको उल्टियाँ आने लगीं। इसे उपयोगिता ह्रास नियम अथवा तुष्टि गुण ह्रास नियम कहते हैं। (इसीलिए लोग कह देते हैं कि इस संसार में दुख ही दुख है।) यही हर ज्ञानेन्द्रियों के लिए है, जो वस्तु प्रारम्भ में हमें सुख देती थी वही बाद में दुख देने लगी। इसीलिए कहते हैं इस संसार में सुख नहीं है। जो शराब उसे प्रारम्भ में मस्ती देती थी, वही शराब पीकर आज वह नाली में मुँह किए हुए अचेत पड़ा है। जिस सुन्दरी को हम देखकर अघाते नहीं थे, उसी सुन्दरी को जब हम आज देखते हैं तो हमें घिन आती है। इस संसार में सुख तो है, मगर यही संसार बाद में दुख देने लगता है। सुख मिलता तो अवश्य है, मगर क्षणिक। यदि आपको सदा के लिए सुख चाहिए तो ईश्वर की तरफ मुड़िए। ईश्वरीय संसार में तुष्टिगुण ह्रास नियम अथवा उपयोगिता ह्रास नियम नहीं लागू होता है। वहाँ एक
बार सुख मिल जाने पर वह सुख सदा के लिए बना रहता है।
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