-(४)-----कीमत समय की------

कोई गरीब हो अथवा अमीर। पढ़ा हो अथवा अनपढ़। बेरोज़गार हो अथवा ओहदेदार। पूछिए तो हर कोई बताता है। सब ठीक है। सब झूठ बोलते हैं।
यहाँ इस संसार में किसी का कुछ भी ठीक नहीं। सब गड़बड़ है। आदमी एक ठीक करने की कोशिश करता है, तब तक दूसरा बिगड़ जाता है। यह दुखमय
संसार है, यहाँ सुखी कोई नहीं। इसलिए
समय का इंतज़ार मत करो। अच्छा समय कभी नहीं आएगा। वैसे भी‌ अक्सर लोगों को समय की कीमत तब समझ में आती है, जब उसके लिए समय बिल्कुल नहीं बचता है। इसलिए आप दूसरों का जीवन जीने में अपना समय मत खर्च करो। ईश्वर की तरफ मुड़ो और अपना बाकी जीवन स्वयं जीने की कोशिश करो। सब अच्छा होगा।
                      -------नैश आत्मन्

Comments

Popular posts from this blog

उपनिषद की‌ सूक्तियाँ--

ऋगुवेद सूक्ति--(56) की व्याख्या

(2) Second Guru Angad Dev Ji Maharaj-- When Emperor Humayun pulled out his sword and try to attack on the neck of Guru Angad Dev Ji, his hand was paralyzed--Read more--