------वह संसार छोड़कर चला गया------

वह संसार छोड़कर चला गया। वह कौन था ? जो इस संसार को छोड़कर चला गया। उसका शरीर तो यहीं पड़ा है, जिसके सिर के पास बैठी हुयी उसकी पत्नी दहाड़े मार कर चिल्ला रही है और कह रही है कि आप मुझे छोड़ कर चले गए। कौन चला गया ? उसका पति तो यहीं पड़ा हुआ है, वह कहीं नहीं गया।
इससे यह स्पष्ट होता है कि वह शरीर नहीं था, वह कुछ और था, जो अब इस संसार में नहीं है। यदि वह शरीर होता तो लोग ऐसा क्यों कहते कि वह इस शरीर को छोड़कर चला गया। जब कोई कहता है कि यह घर उसका था, यह खेत उसका था, तब लोग झूठ बोलते हैं। यदि यह घर उसका होता तो इसे वह अपने साथ ले जाता। यदि यह खेत उसका होता तो इसे भी वह अपने साथ ले जाता। यदि पत्नी‌ उसकी होती तो वह अपनी पत्नी को साथ ले जाता। यदि पुत्र उसके होते तो वह  पुत्र को अपने साथ ले जाता। इसका अर्थ
यह है कि इस संसार में व्यक्ति का कुछ
भी अपना नहीं होता है। वह इस संसार
की वस्तुओं पर अथवा वह इस संसार के व्यक्तियों पर जीवन भर अपना झूठा
दावा पेश करता रहता है। अब प्रश्न उठता है कि वह कौन था ? जो चला गया। मैं कौन हूँ ? जो एक दिन इस संसार को छोड़कर जाने वाला हूँ, मेरा सब कुछ तो यहीं रह जाने वाला है। मैं खाली हाथ यहाँ‌ से जाऊँगा। कब जाऊँगा ? आज या कल।अथवा सौ वर्ष बाद। मैं यह भी तो नहीं जानता। हमारे धर्मग्रन्थ कहते हैं--वह जीव है। जब यह शरीर उसके लिए उपयोगी नहीं रह जाता है, तब वह इस शरीर को छोड़कर चौरासी लाख योनियों में अपने कर्म के अनुसार किसी अन्य शरीर को पाने के लिए यहाँ से चला जाता है। जिस जीव ने मानव शरीर पाकर ईश्वर की आराधना की वह या तो जन्म-मरण के
बन्धन से मुक्त हो गया अथवा अपनी अधूरी साधना को आगे बढ़ाने हेतु वह पुनः मानव शरीर को लेकर इस संसार में आता है, और जिसने आराधना नहीं की वह कूकर-शूकर का शरीर पाकर अनन्त काल  तक अन्य योनियों में भटकता रहेगा। आप भी ईश्वर की तरफ
मुड़िए और आज ही उसकी आराधना में लग‌ जाइए।


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