-----वह अपने भाग्य को कोस रहा है-----

कोई कहता है मैने अपने लड़के को आई०ए०एस० बना दिया है। कोई कहता है मैने अपने लड़के को पी० सी० एस० बना दिया है। कोई कहता है मैने अपने लड़के को डाक्टर बनाया है। कोई कहता है मैने अपने लड़के को इंजीनियर बनाया है। सब झूठ बोलते हैं। न कोई किसी को बनाता है,  न कोई किसी को बनाया है और न ही किसी में कुछ भी निर्माण करने की सामर्थ्य है।    जिसको बनना होता है, वह बन जाता है। जिसको नहीं बनना होता‌ है, वह कभी नहीं बनता है। राजा चित्रकेतु ने एक सन्तान के लिए एक करोड़ विवाह किए, परन्तु उन्हें एक भी सन्तान नहीं हुयी। जिसका बना है, वह दूसरों के सामने बहकी-बहकी बातें करता है, जिसका बिगड़ा है, वह अपने भाग्य को कोस रहा है, यही इस संसार की वास्तविकता है यदि ‌हममें भविष्य में झाँकने की सामर्थ्य होती, तो इस संसार का भेद हम जान लेते। परम पिता परमेश्वर ने इस प्रकार की सामर्थ्य हमें नहीं दिया है। यह हम पर उनकी क़ृपा है। अन्यथा सभी इस संसार की वास्तविकता को जान लेते और चौरासी कोटि योनियों का संसार समाप्त हो जाता, सभी जीव इस संसार से मुक्त होकर अब तक सतलोक (गोलोक) पहुँच चुके होते। हम आपको  ईश्वर की ओर बुलाते हैं। आप ईश्वर की ओर मुड़िए। आप स्वयं इस संसार की
वास्तविकता को समझ जाएँगे।
 

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