-(१)----भारतीय दर्शन-------
भारतीय दर्शन को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है ---
(१) नास्तिक दर्शन (२) आस्तिक दर्शन
नास्तिक दर्शन में प्रमुख तीन दर्शन आते हैं---(१) चार्वाक दर्शन (२) जैन दर्शन (३) बौद्ध दर्शन
आस्तिक दर्शन में छः दर्शन आते हैं---
(१) वैशेषिक दर्शन (२) वेदान्त दर्शन (३) न्याय दर्शन (४) मीमांसा (५) सांख्य दर्शन (६) योग दर्शन। इनमें से सभी दर्शन दुख निवृत्ति का उपाय बताते हैं, केवल वेदान्त दर्शन ने ही आनन्द प्राप्ति के उपाय की व्याख्या की है। वेदान्त दर्शन का मत है कि आनन्द प्राप्ति होने पर दुख स्वतः समाप्त हो जाता है, ठीक वैसे ही जैसे प्रकाश आते ही दुख समाप्त हो जाता है।
इस दर्शन के संदर्भ में एक विष्णु स्तोत्र का श्लोक है--
यं शैवाः समुपास्ते शिव इति ब्रह्मेति वेदान्तिनो। बौद्धा बुद्ध इति प्रमाण पटवः कर्तेति नैयायिकाः। अर्हन्नित्यथ जैन शासनरतः कर्मेति मीमाँसकाः।सोऽयं न विद्धातु वांछित फलं त्रैलोक्य नाथ्यो हरिः।
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