200+अनमोल बातें; क़ुरआ़न से(2)
(51) न उसकी (खुदा की) कोई औलाद और न वह(खुदा) किसी की औलाद। ---------इखलास; [3] (52) खराबी है उसके लिए जो पीठ पीछे बदी करता है।--हम्ज़ा; [1] (53) तुम्हें गाफिल रखा, माल की ज़्यादा तलब ने। ---तकासुर; [1वा2] (54) खुदा को जानने वाला माल से तलब नहीं रखता।---तकासुर; (5). (55) आदमी अपने रब का बड़ा नाशुक्रा है।-आदियात; [6]. (56)-शबे क़द्र (रमज़ान की 27 वीं रात) हज़ार महीनों से बेहतर है।-
--क़द्र; [3]. (57)अपने रब की ही तरफ रग़बत (चाह) करो। ------इंशिराह; [8] (58)-आदमी को (खुदा ने)खून की फुटक से बनाया।-अलक़; [2]. (59) तुम्हारा माल तुम्हारे काम नहीं आएगा जब तुम हलाक़त में पड़ोगे। -----लैल; [11] (60) वह (नेक इंसान) सिर्फ अपने रब की रज़ा चाहता है जो सबसे बुलन्द है। -----लैल; [20]. (61) वह (खुदा) इतना देगा कि तुम खुश हो जाओगे -जुहा[5] .(62) तुम्हें हाज़तमंद पाया तो (खुदा ने) तुम्हें ग़नी बना दिया।--जुहा; [8] (63) यतीम पर दबाव न डालो। ------जुहा; [9] (64) माँगता को मत झिड़को। -----जुहा; [10] (65) अपने रब की नियामत की खूब चर्चा करो।--जुहा; [11]. (66)हमने (खुदा ने) तुम पर से तुम्हारा बोझ उतार लिया।--इंशिराह; [2]. (67) हमने (खुदा ने) तुम्हारे लिए तुम्हारा ज़िक्र बुलन्द किया। ---इंशिराह; [4] (68) तेरे रब की गिरिफ्त बहुत सख्त है। -बुरुज; [12] (69) वह (खुदा) इल्म व हिकमत वाला है। -बहर; [30]. (70) कुरआ़न खूब ठहर ठहर कर पढ़ो। ------मुजम्मिल; [4]. (71) खुदा के साथ किसी की बंदगी न करो।------जिन्न; [18]. (72) हमारे रब की शान बहुत बुलन्द है। न उसने औरत इख्तियार की और न बच्चा। -------जिन्न;(3). (73) जब अज़ाब आता है तब कोई दोस्त किसी दोस्त की बात नहीं पूछता।----मआरिज़ [10]. (74) क़ुरआ़न डर वालों को नसीहत है। -------हक्क़ा; [48]. (75) खुदा फासिकों को राह नहीं देता। -मुनाफिकन; [6] शफक़; [5]. .(76) खुदा जान को मुहलत नहीं देता, जब उसका वादा आ जाए। --- मुनाफिकन[11]. (77) जो चोरी करे मर्द हो या औरत, उनके हाथकाटडालो।- माइदा; [38]. (78) खुदा हक़ मारने वाले को पसंद नहीं करता। -----बकरा; [276]
(79) ऐ मोमिनो! अगर ईमान रखते हो तो जितना सूद बाकी रह गया हो, उसे छोड़ दो। ------बकरा; [278] (80) अगर कर्ज़ लेने वाला तंगदस्त है तो कर्ज़ की रक़म बख्श ही दो तो तुम्हारे लिए यह अच्छा है।----बकरा; [280] (81)अगर किसास में तुम्हारी ज़िंदगानी है तो तुम कत्ल व खूंरेजी से बचो। ------बकरा; [179] (82) जो लोग तुमसे लड़ते हैं, तुम भी खुदा की राह में उनसे लड़ो, मगर ज़्यादती मत करना।--बकरा; [190] (83) जब अहद करें तो उसे पूरा करें। -- बकरा; [177]. (84) सख्ती में, तकलीफ में, लड़ाई के मैदान में साबित क़दम रहें। ---बकरा; [177] (85) ऐसे लोगों की तौबा कुबूल नहीं होती जो (सारी उम्र) बुरे काम करता रहे। --निसा; [18]. >. (86) यह खुदा का फज़्ल है कि वह जिसे चाहे दे। -जुमअ; [4] (87) खुदा दोस्त रखता हैं उन्हें, जो उसकी राह में चलते हैं।- सफा; [4]. (88) वही है खुदा जिसके सिवा कोई मा,बूद नहीं,वह बादशाह है,वह निहायत पाक, सलामती देने वाला,अमान बख्शने वाला, हिफाज़त फररमाने वाला, इज़्ज़त वाला, अज़मत वाला, तकब्बुर वाला है। ----हश्र; [23]. (89) खुदा और उसके रसूल के फरमाबरदार रहो।--मुजादला; [13] (90) वह जो खुदा और उनके रसूल की मुखालफत करते हैं , वह सबसे ज़्यादा ज़लीलों में हैं।--मुजादला; (20) (91) बेशक खुदा सुनता देखता है। - --मुजादला; [1]. (92) अल्लाह ज़रूर माफ करने वाला ओर बख्शने वाला है।--मुजादला[2] (93) क़यामत निहायत कड़वी और सख्त कड़वी होती है।--कमर; [46]. (94) खुदा ने इंसानियत की जान, मुहम्मद को पैदा किया।--रहमान; [3]. (95) इंसाफ के साथ तौल कायम करो और वज़न न घटाओ।--रहमान;[9]. (96) हमने आसान किया कुरआन याद करने के लिए, तो है कोई याद करने वाला। ----कमर; [40]. (97) तुम्हारा रब खूब जानता है जो उसकी राह से बहका और खूब जानता है उसे जिसने राह पायी।--नज़्म; (30) (98) उस प्यारे चमकते मुहम्मद की कसम! जब वह मेराज से उतरे, तुम्हारे साहब न बहके और न बेराह चले। ---नज्म; [2] (99) सब आदमी अपने किये में गिरफ्तार है। ----तूर; [21] (100) हम जानते हैं जो वसवसा (बुरा ख्याल) आदमी का नफ्स डालता है। ----- काफ; [16] ********************* *†****
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