200+अनमोल बातें; क़ुरआन से (4)

(151) हमने जहन्नम को काफिरों का     क़ैदखाना बनाया है।बनी इस्राइल;[8] (152)-क्या तुम नहीं जानते कि आसमानों और धरती का राज्य खुदा का है।    ------बकरा; [107].     (153) दीने इब्राहीम की पैरवी करो।                -----नहल; [123]    ‌     (154) खुदा उसके साथ है जो नेकियाँ करते हैं।-नहल; [128]              (155) जिस किसी ने एक बेक़सूर का कत्ल किया तो मानों उसने सारे इंसानों का कत्ल कर दिया। --माइदा; [32]  (156) जिस किसी ने एक बेक़सूर को बचाया तो मानो उसने सारे इंसानों को बचा लिया।    -माइदा; [32]       (157) तबाही है.उन नमाज़िँयों के लिए जो अपनी नमाज़ से ग़ाफिल हैं, जो दिखावे का कार्य करते हैं।                               -----------माऊन; [1]           (158) खुदा तुम्हें नसीहत फरमाता है कि तुम ध्यान करो।--नहल; [90]           (159) जब कौल बाँधो तो उसे मत तोड़ो।             -----नहल; [191]  (160) जिन्होंने खुदा की राह में अपने घर बार छोड़े मज़लूम होकर। हम उन्हें दुनिया में अच्छी जगह देंगे।                                  --नहल; [40]         (161) वह (खुदा) मगरूरों को पसंद नहीं करता।----नहल; [23]          (162) बेशक हमने उतारा है यह क़ुरान, हम खुद इसके निगेहबान हैं।                        ----- हिज्र; [9]            (163 ) खुदा ज़ालिमों को गुमराह करता है।     --इब्राहीम; [27].    (164) लोगों को अपनी वे खराब चीज़ें न दो जिन्हें तुम खुद न लेना चाहो।                         -----बकरा; [271]   (165) नसीहत वही मानते हैं जिन्हें अक़्ल है।     -----रअ़द; [19].    (166)  हम नेकों का नेक जाया नहीं करते।यूनुस[56]हूद[115]तौबा[120] (167) खुदा दग़ाबाजों का मक़्र नहीं चलने देता।------यूसुफ;[52]       (168) नेकियाँ बुराइयों को मिटा देती हैं।                -- हूद; [114]          (169)  साबित क़दम रहो, नादानों की राह न चलो।--------यूनुस;[89].      (170) हमारे फरिश्ते तुम्हारा मक़्र लिख रहे हैं।       ------ यूनुस; [21].        (171)जब आदमी को तकलीफ होती है, हमें पुकारता है- लेटे, बैठे, खड़े, हम उसकी तकलीफ को दूर करतेे हैं।--                      --------यूनुस; [12]             (172) खुदा फासिकों को राह नहीं देता।-           -----  तौबा; (80).           (173) खुदा की राह में लड़ो अपने  माल और जान से।---तौबा; [41]          (174) खुदा सब्र वालों के साथ है।                       -- अन्फाल; [66]     (175) साबित कदम रहो,अल्लाह को याद करो।-----अन्फाल; [45]      (176) यहूद और नसारा को दोस्त न बनाओ।------माइदा;[51].           (177) हरगिज  मसीह अल्लाह का वंश बनने से कुछ नफरत नहीं करता।-                   निसा; [172]                  (178) खुदा पसंद नहीं करता बुरी बात का एलान करना।-निसा; [149]    (179)  उनके यह कहने पर कि हमने मसीह  इब्ने मरयम को शहीद किया, मगर यह कि  उन्होंने न उनका कत्ल किया, न उन्हें सूली दी बल्कि अल्लाह ने उन्हें अपनी तरफ उठा लिया।                                  ----निसा; [157]   (180) खुदा नहीं चाहता किसी बड़े दग़ाबाज गुनहगार को।--निसा; [107] (181) हमने मरयम के बेटे ईसा को खुली निशानियाँ दीं।-बकरा; [253](182) अगर तीसरी तलाक दी तो वह  औरत अब उसे हलाल न हो होगी, जब तक वह दूसरे खाविन्द के पास न रहे, फिर जब दूसरा तलाक दे दे तब उन दोनों पर गुनाह नहीं कि फिर आपस में मिल जाएँ।    -- बकरा; [230]     (183) शिर्क वाली औरतों से निकाह न करो, जब तक वह मुसलमान न हो जाए।          ---  बकरा; [221]       (184) कुन फाया कुन।--बकरा[117]   {कुन का अर्थ 'हो जा'(To be),फाया कुन का अर्थ 'हो जाता है '(It is).}.        (185)जो लोग यतीमों का माल नाजायज़ तौर पर खाते हैं, वे अपने पेट में आग भरते हैं, वे दोजख में डाले जाएँगे।     ---------निसा; [10]    (186) गुस्से को पी जाओ।                        -      -----इमरान; [134]    (187) सच और झूठ को आपस में न मिलाओ।-      ----बकरा; [42]    (188) अपने माल में से खैरात करो।                      -----हदीद; [7].      (189) कंजूसी और फिजूलखर्ची से बचा करो।- इस्राइल; [29]         (190) ज़रूरतमंदों को तलाश कर उनकी मदद करो।----बकरा; [273].     (191) मेहमान की इज्ज़त करो।                                ----ज़ारियत; [26] 
(192) सिर्फ उनसे लड़ो जो तुमसे लड़़ें।                   ----बकरा; [190]  (193) किसी   पर उसकी ताक़त से जयादा  बोझ न डालो।- बकरा; [286]            
 (194) हसद मत करो।--निसा; [54]     (195) अक्सरियत में होना सच्चाई का सबूत नहीं।--अनआ़म; (116).   (196) जुआ मत खेलो।-माइदा;[90].  (197) शराब और नशीली दवाओं से खबरदार रहो। --अनआ़म;[160].     (198) जिस बात का इल्म न हो,उसके पीछे मत पड़ो।--- इस्राइल[36].  (199) भलाई करने के बाद दूसरों को भलाई करने का बढ़ावा दो।                                       -----बकरा; [44].    (200) कोई तंगी में है तो उसका कर्ज़ उतारने में मदद करो।-बकरा;[280] (201) दीन (इस्लाम) में ज़बरदस्ती नहीं।   --------- बकरा(222).    ******************************                    ********                                             ***

Comments

Popular posts from this blog

उपनिषद की‌ सूक्तियाँ--

ऋगुवेद सूक्ति--(56) की व्याख्या

(2) Second Guru Angad Dev Ji Maharaj-- When Emperor Humayun pulled out his sword and try to attack on the neck of Guru Angad Dev Ji, his hand was paralyzed--Read more--