200+अनमोल बातें; क़ुरआ़न से (3)

(101) हम (खुदा) दिल के रग से भी
ज़्यादा आदमी के नज़दीक हैं।
                ---- काफ; [16] 
(102) जो तौबा न करे वह ज़ालिम है।
              ----हुजरात; [11]
(103) गुमान से बचो।-हुजरात; [12]
(104) ऐब न ढूँढो। --हुजरात;[12]
(105) जो आखि़रत की खेती  चाहता है, हम उसकी खेती‌ बढ़ाते हैं।
            ‌‌  ‌‌‌‌‌‌‌‌ --------शूरा; [20]
(106) जो दुनिया की खेती चाहता है ‌आखि़रत में हम उसका सब ले लेते हैं।
                 --------शूरा; [20]
(107) खुदा अपनी रहमत में लेता है
जिसे चाहता है।------शूरा; [8].             (108) बुराई को भलाई से टालो।
                   ------सज़्दा; [34]
(109) जिस दीनी राह का हुक़्म हमने
नूह, इब्राहीम, मूसा और ईसा को दिया,
उस दीन को ठीक रखो, उसमें फूट मत डालो।           --------शूरा; [13]
(110) खुदा राह नहीं देता उसे जो हद  से बढ़ने वाला बड़ा झूठा है।
                    -----मोमिन; [28].       
(111) ग़म से भरे और ज़ालिमों का न कोई और, न कोई सिफारिश, जिसका कहा माना जाए।--मोमिन;[18]
(110) खुदा हर चीज़ को पैदा करने वाला है और हर चीज़ का मुख्तार है।
                    ------जुमर; [62]
(111) खुदा रोज़ी कुशादा करता है, जिसे चाहे और रोज़ी तंग करता है,जिसे
चाहे।           --------जुमर; [52]
(112) जिसे खुदा हिदायत दे, उसे 
कोई गुमराह करने वाला नहीं।,
                    -------जुमर[37]
(113) खुदा वफात देता है जानो को,    उनकी मौत के वक्त।--जुमर; [42]
(114) यह खुदा की हिदायत है, राह
दिखाए उसे जिसे चाहे और जिसे खुदा
गुमराह करे, उसे कोई राह दिखाने वाला
नहीं।            -----जुमर; [23].             (115) ऐ मेरे बन्दों ! तुम मुझसे डरो।
                   ------जुमर; [16]
(116) खुदा राह नहीं ‌देता, जो झूठा ‌है,
बड़ा नाशुक्रा है।--जुमर; [3]                (117) इज़्जत तो खुदा के हाथ में होती है।            -------फातिर; [10]
(118) ऐसी नर्मी न करो कि ‌दिल का
रोगी कुछ लालच करे।-अहजाब; [32]
(119) अच्छी बात कहो।-अहजाब[32]
(120) तुम्हें वफात देता है मौत का फरिश्ता, जो तुम पर मुक़र्रर है। फिर अपने रब के पास वापस जाओगे।
              -----सज़्दा; [11]
(121) तुम्हारे लिए खुदा के सिवा ‌न ‌कोई काम बनाने वाला न कोई मददगार।
     ----------अन्कबूत; [22]
(122) अक्सर आदमी हक़ नहीं मानते।
                   -----नम्ल; [73]
(123) नाप पूरा करो और घटाने वालों में न हों।-शुअरा; [181],हूद; [84]
(124) सीधी तराजू से तौलो।
           ---शुअरा; [182]
(125) लोगों को चीज़ें कम करके न दो
और ज़मीन में फसाद फैलाते न फिरो।
                ----शुअरा; [183]
(126) जिसने मुझे पैदा किया, वही राह देगा।       -----शुअरा; [78]
(127) वही (खुदा) मुझे खिलाता  पिलाता है।--शुअरा; [79]
(128) जब बीमार होता हूँ तब वह शिफा देता है।---शुअरा; [80]
(129) हमने ज़ालिमों के लिए दर्दनाक
अज़ाब तैयार कर रखा है।
                  ----फुरकान; [37]
(130) उसने हर चीज़ पैदा करके ठीक
अंदाज़ पर रखी है।--फुरकान; [2]
(131) बदकार औरत हो या मर्द, उन्हें सौ कोड़े लगाओ।----नूर; [2]
(133) खुदा की मार‌ कड़ी है।--हज[2]
(134) हम परहेज़गारों को ले जाएँगे
रहमान का मेहमान बनाकर।
                  ------मरयम[85]
(135) मुजरिमों को हाँकेंगे जहन्नुम की तरफ प्यासे।----मरयम; [86]    
(136) आसमानों और ज़मीनमें,जितने 
हैं सब उसके सामने बन्दे होकर हाज़िर होंगे।----मरयम; [93]
(137) यह वह खुशनुमा बाग है, जिसका वारिस हम अपने बंदों में उसे करेंगे, जो परहेज़गार है।---मरयम[63]
(138) ईसा ने कहा, बेशक एक ही रब है मेरा और तुम्हारा, तो उसकी बंदगी
करो, यह राह सीधी है।-मरयम[36]
(139) इब्राहीम बाप से बोला, ऐ मेरे
बाप ! क्यों ऐसे को पूजता है ? जो न सुने न देखे,न कुछ तेरे कामआए।
                    ------मरयम; [42]         
(140)मैं बुढ़ापे से सूख जाने की हालत में पहुँच गया हूँ। ---मरयम; [8]  
(141) मैने काफिरों की मेहमानी के लिए जहन्नम तैयार कर रखी है।
                   -------काफ; [102]
(142) हरगिज़ किसी बात को मत कहना कि इसे मैं कल कर दूँगा।
         ‌       --------कहफ; [23]
(143) नमाज़ न बहुत आवाज़ से पढ़़ो और न बहुत आहिस्ता,इन दोनो के बीच का रास्ता चुनो।--इस्राइल; [110]
(144) आदमी बड़ा कंजूस है।
               ------इस्राइल; [100]
(145) जो मेरे बंदे हैं उन पर तेरा (शैतान) कुछ काबू नहीं।-इस्राइल[65]
(146)शैतान आदमियों का खुलादुश्मन
है, वह आपस में फसाद डाल देता है।
    ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌           ------इस्राइल; [53]
(147) यताीम के माल के पास न जाओ।-----इस्राइल; [34]
(148) बदकारी के पास मत जाओ,
बेशक यह बेहयायी है और बुरी राह।
                ------इस्राइल; [32]
(149) अपने माँ-बाप के साथ अच्छा
सुलूक करो।--इस्राइल; [23]
{150) हर इंसान की किस्मत हमने
उसके गले में लगा दी है।
                  ----इस्राइल; [13]
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