150+अनमोल वचन:बाइबिल(नया नियम) से (दूसरी किस्त)

(51) पिता ने जो काल और मुहूर्त अपने निजी अधिकार से निश्चित किए हैं, वह तुम लोगों को जानने का अधिकार नहीं है।प्रेेरित चरित(1:7, (52) पवित्र आत्मा तुम लोगों पर उतरेगाऔर तुम्हें सामर्थ्य प्रदान करेगा-प्रेरित चरित(1:8,(53) यूदस ईसा को गिरफ्तार कराने वालों का अगुआ बन गया था। प्रेरित चरित (1:16,(54) यूदस ने अपने अधर्म की कमाई से एक खेत खरीदा, वह उसमें पेट के बल गिरा,उसका पेट फट गया, अँतड़ियाँ बाहर आ गयीं।-प्रेरित चरित (1:18)(55) ईसा ईश्वर की ओर से आपके पास भेजेगएप्रेरितचरित(2:22)
(56)तूने मुझेजीवन का मार्गदिखायाहै, 
तेरे पास रहकर मुझे परिपूर्ण आनन्द मिलेगा। प्रेरित चरित(2:28 )(57)जिन्हें आप लोगों नेक्रूसपरचढ़ाया,ईश्वरनेउन्हीं  ईसा को प्रभु भी बना दिचा हैऔर मसीह भी।  --प्रेरित चरित(2:36)(58). समस्त संसार में ईसा नाम के सिवा मनुष्यों को कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया है, जिसके द्वारा मुक्ति मिल सके।--प्रेरित चरित(4:12).(59) प्रभु ईसा में विश्वास कीजिए तो आपको औरआपके परिवार कोमुक्तिमिलेगी।प्रेरितचरित (16:31), (60) केवल एक ही ईश्वर है जो खतने वाले को विश्वास द्वारा पाप मुक्त करता हैऔर ग़ैर खतने वाले को भी।--रोमियो के नाम (3:30),(61) मैने तुमको बहुत से राष्ट्रों का पिता नियुक्त किया है।-रोमियो के नाम((4:17)(61) वही ईसा हमारे अपराधों के कारण, पकड़वाये गए और हमारे पाप मुक्ति के लिए जी उठे।--रोमियो के नाम(4:25),(62)धार्मिक मनुष्य के लिए शायद ही कोई मनुष्य अपने प्राण अर्पित करे--रोमियो के नाम(5:7).(63) एक ही मनुष्य द्वारा संसार में पाप का प्रवेश हुआ और पाप से मृत्यु का--रोमियो के नाम(5:12),(64) जो मर चुका, वह पाप की गुलामी से मुक्त हो चुका।--रोमियो के नाम(6:7),(65) अब आप लोग अपने मरणशील शरीर में पाप का राज्य स्वीकार न करें।और उसकी वासनाओं के अधीन न रहें।--रोमियो के नाम(6:12),(66) मैं कर्ता नहीं रहा, बल्कि कर्ता है मुझमें निवास करने वाला पाप।-रोमियो के नाम(6:17),(67) मैं जो भलाई चाहता हूँ, वह नहीं कर पाता बल्कि मैं जो बुराई नहीं चाहता,वही कर डालता हूँ।-रोमियो के नाम(7:19)(68) जो शरीर की वासनाओं से संचालित  हैं, उन्हें मत्यु मिलती है--रोमियो केनाम (8:5). (69) जो आत्मा से संचालित हैं,उन्हें शान्ति मिलती है।-रोमियो के नाम(8:6).(70) ईश्वर हमारे हृदय का रहस्य जानता है।रोमियो केनाम(8:27), (71) जो लोग शरीर की वासनाओं से संचालित हैं, उन पर ईश्वर प्रसन्न नहीं रहता।-रोमियो के नाम (8:8,(72) उसने (ईश्वर) ने,जिन्हें पहले से निश्चित किया है,उन्हें बुलाया भी है, उन्हें पाप  मुक्त भी किया है, उन्हें महिमा मंडित    भी किया है।-रोमियो के नाम(8:30);(72) जिन्हें ईश्वरनेचुना है,उन परकौन अभियोग लगाएगा।-रोमियो के नाम (8:33),(73) जिन्हें ईश्वर ने दोषमुक्त कर दिया है, उन्हें कौन दोषी ठहराए- रोमियो के नाम(8:34).(74) मैं जिस पर दया करना चाहूँगा, उसी पर दया करूँगा, यह मनुष्य की इच्छा और 
उसके परिश्रम पर निर्भर नहीं रोमियो के नाम(9:15) ,(75) यहूदी और यूनानी में कोई भेद नहीं,सभी का प्रभु एक है।-रोमियो  के नाम(9:11),(76) जो ईश्वर पर विश्वास करता है, उसे लज्जित नहीं होना पड़ेगा।-रोमियो के नाम(9:12).(77) किसने  ईश्वर को कुछ दिया है, जो बदले में कुछ पाने का दावा कर सके।रोमियो के नाम (11:35),(78) दुनिया की दृष्टि में अच्छा आचरण करने का ध्यान रखें।रोमियो के नाम(12:17), (79) जहाँ तक हो सके सभी के साथ अपनी ओर से मेल-मिलाप बनाए रखें।--रोमियो के नाम(12:18)(80)आप स्वयं बदला न लें बल्कि ईश्वर के प्रकोप पर छोड़ दें, क्योंकि प्रभु कहता है--
"प्रतिशोध मेरा अधिकार है, मैं ही बदला चुकाऊँगा।"-रोमियो के नाम(12:19),(81)  अपने को औचित्य से अधिक महत्व मत दीजिए।-रोमियो के नाम (12:3),(82)अपने  आपको बुद्धिमान न समझें।रोमियो के नाम(12:16)(83) प्रत्येकव्यक्तिअधिकारियों के अधीन रहे, क्योंकि ऐसा कोई अधिकार नहीं जो ईश्वर का दिया हुआ न हो।रोमियो के नाम(13:1),(84)यदिआप अधिकारियों के भय से मुक्त रहना चाहते हैं तो सद्कर्म करते रहें,वे आपकी प्रशंसा करेंगे।-रोमियो के नाम (13:1).(85) भ्रात प्रेम का रिण छोड़कर आप किसी के रिणी मत बनें।रोमियो के नाम (13:8).(86) कोई न तो अपने लिए जीता हैै और न अपने लिए मरता है, सब प्रभु के लिए जीते हैं, प्रभु के लिए मरते हैं, फिर जिएँ अथवा मरें।-रोमियो के नाम(14:8),(87) ज्ञानियों को लज्जित करने के लिए ईश्वर ने उन लोगों को चुना है, जो दुनिया की दृष्टि में मूर्ख हैं।- कुरिन्थियों के नाम(1:27),(88) शक्तिशालियों को लज्जित करने के लिए ईश्वर ने उन लोगों को चुना है जो दुनिया की दृष्टि में दुर्बल हैं।-कुरिन्थियों के नाम (1:27),(89) यदि कोई गर्व करना चाहे तो प्रभु पर गर्व करे।---------कुरिन्थियों के नाम(1:31),(90)ईश्वर नेजो अपने भक्तों के लिए तैयार किया है,उसको कभी किसी ने देखा नहीं, किसी ने सुना नहीं और न कोई उसकी कल्पना ही कर पाया।-कुरिन्थियों के नाम(2:9),(91) आध्यात्मिक  मनुष्य सब बातों की परख करता है।-कुरिन्थियों के नाम(2:15)
(92) आध्यात्मिक मनुष्य की परख कोई नहीं कर पाता--कुरिन्थियों के नाम(2:15)   (93) यदि कोई भाई लोभी,व्यभिचारी,निन्दक,शराबी या धोखेबाज है तो उसके
साथ भोजन तक न करें।--कुरिन्थियों के नाम(5:12),(94) बाहर वालों का न्याय करना आपका काम नहीं, ईश्वर बाहर वालों का न्याय करेगा। ---कुरिन्थियों के नाम (5:13),(95) मुकदमा की अपेक्षा आप अन्याय सह लीजिए,अपनी हानि होती है तो होने दीजिए।--कुरिन्थियों के नाम(6:7)(96) शरीर प्रभु के  लिए है, प्रभु शरीर के लिए, शरीर व्यभिचार के लिए नहीं।कुरिन्थियों के नाम (6:13),(97) अविवाहित रहकर आत्म संयम से रहें तो उत्तम है।कुरिन्थियों के नाम(7:9)(98) यदि आत्मसंयम से नहीं रह सकते तो विवाह करना अच्छा है।--कुरिन्थियों के नाम(7:9)(99) पति के शरीर पर पत्नी का तथा पत्नी के शरीर पर पति का अधिकार होता।है, आप एक दूसरे के अधिकार से वंचित न करें।----------कुरिन्थियों के नाम(7:4)(100) ज्ञान  घमण्डी बनाता है,जब कि प्रेम निर्माण करता है।-कुरिन्थियों के नाम(8:1)
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