200+अनमोल बातें; क़ुरआ़न से(1)
(1) खुदा की राह में खर्च करो।
---- बकरा; [195]
(2) भलाई वाले खुदा के महबूब हैं।
-----बकरा; [195]
(3) खुदा पसंद करता है सुथरों को।
--बकरा; [222], तौबा; [8]
(4) नेकी वाले खुदा के प्यारे हैं।
--इमरान; [134वा148], माइदा; [ 93]
---------एराफ; [56 ]
(5) एहसान वाले खुदा के महबूब हैं।
--- माइदा; [13]
(6) इंसाफ वाले खुदा को पसंद हैं।
------माइदा; [42], मम्ततिना; [8]
(7) खुदा परहेजगारों को दोस्त बना लेता है। -----तौबा [4वा7]
(8) अच्छे काम करने वालों से खुदा
मुहब्बत करता है।---मरयम [46]
(9) सब्र वाले खुदा के महबूब हैं।
-इमरान; [146], बकरा; [153]
(10) तवक्कुल वाले खुदा के प्यारे होते
हैं।------इमरान; [159]
(11) हद से बढ़ने वालों को खुदा पसंद नहीं करता।-बकरा; [159],माइदा; [87]
---- एराफ; [31वा55]
(12) खुदा फसाद से राज़ी नहीं।
---बकरा; [205] एराफ; [56]
-----माइदा; [64] कसस; [77]
(13) खुदा को काफिर(खुदा को न मानने वाले) पसंद नहीं आते।
----इमरान; [32]
(14) ज़ालिम खुदा को नहीं भाते।
-इमरान; [57] , शूरा[40]
(15) इतराने वाले को खुदा पसंद नहीं करता।---निसा; [36]. कसस; [76] (16) बुराई करने वाले को खुदा पसंद नहीं करता।----निसा; [36]
(17) बुरी बात कहने वाला खुदा को नहीं भाता।-----निसा; [148]
(18) दगा वाले खुदा को पसंद नहीं।
-अन्फाल; [58], निसा[107]
(19) मगरूर को खुदा पसंद नहीं करता।-------नहल; [23]
(20) कहकर न करने वाले को खुदा
पसंद नहीं करता।--सफ; [3]
(21) नाशुक्रा खुदा को पसंद नहीं।
-----बकरा; [276]
(22) खुदा गुनहगार को नहीं चाहता।
-----निसा; [107]
(23) माँ-बाप के साथ भलाई करो।
---बकरा; [83]
(24) लोगों से अच्छी बात कहो।
------बकरा; [83]
(25) जब खुदा फरमाता है,यह हो जा!
तब वह फौरन हो जाता है।
-----बकरा; [117]
(26) खुदा पुकारने वालों की दुआ कुबूल करता है।--बकरा; [186]
(27) खुदा सबसे बेहतर तदवीर वाला है।- इमरान; [54], अन्फाल[30]
(28) खुदा बख्शने वाला मेहरबान है।
---इमरान; [129]
(29) खुदा हर चीज़ पर कादिर है।
----माइदा; [120], हूद: [4]
(30) खुदा का अज़ाब सख्त होता है।
-----अन्फाल; [25]. (31) खुदा लोगों पर ज़ुल्म नहीं करता।
-----यूनुस; [44]
(32) खुदा दिलों की बात जानता है।
------हूद; [5], जुमर[7]
(33) खुदा खैरात वालों को सिला देता है। -----यूनुस; [(88]
(34) खुदा की याद में दिलों को चैन
मिलता है।------रअ़द[28]
(35) खुदा अपने हुक़्म में किसी को शरीक नहीं करता।--कहफ; [26]
(36) हरगिज़ किसी बात को मत कहना कि मैं इसे कल कर दूँगा।
---कहफ; [23]
(37) नमाज़ मना करती है, बेहयायी
और बुरी बात को।-अन्कबूत; [45]
(38) खुदा की रहमत से नाउम्मीद न हों। ---जुमर; [53]
(39) खुदा को तुम्हारे कामों की खबर है। ----मुनाफकून; [11]
(40) तुम्हें तुम्हारा दीन,मुझे मेरा दीन।
------काफिरून; [6]
(41) खुदा बहुत तौबा कुबूल करने वाला है। -----नस्र; [3]
(42) खुदा बेनियाज़ है।-इखलास; [2]
(43) किसी ने एक बेक़ुसूर का कत्ल किया तो मानो उसने सारे इन्सानों का
क़त्ल कर दिया।-माइदा; [32]
(44) किसी ने एक बेकुसूर का क़त्ल होने से बचाया तो मानो उसने सारे इन्सानों का कत्ल होने से बचाया।
----माइदा; [32]
(45) अच्छी बात कहना और दरगुज़र करना, उस खैरात से बेहतर है जिसके बाद खुद के लिए तकलीफ हो।
---बकरा; [263]
(46) ज़िना के पास कभी मत जाओ
बेशक वह बेहयायी है,और बहुत ही बुरी राह।------इस्राइल; [32]
(47) जब जाहिल लोग जाहिलाना बात
करें तो कह दीजिए,अच्छा आपको सलाम।-----फुरकान; [63]
(48) कहो--हक़ आ गया और बातिल
मिट गया। आखिर में बातिल को मिटना ही होता है।-इस्राइल; [81]
(49) जिन्हें आखि़रत से दुनिया की ज़िंदगी ज़्यादा प्यारी है और जो दूसरों
को भी खुदा की राह से रोकते हैं, वे दूर
की गुमराही में हैं।---इब्राहीम; [3]
(50) गुनाह और बेहयायी से बचो, जब दूसरों पर गुस्सा आए तो उसे माफ कर दो।----------शूरा; [37]
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