--रिश्ता खून का भी सगा नहीं होता------

कौन कहता है खून का रिश्ता सगा होता है ? सब झूठ बोलते हैं। सतयुग में हिरण्यकश्यपु और प्रहलाद बाप बेटे थे। त्रेता में रावण-विभीषण और बालि-सुग्रीव भाई-भाई थे। जो एक दूसरे‌ के कारण मारे गए। द्वापर में कुन्ती और कर्ण माँ-बेटे थे। कुन्ती ‌ने कर्ण को नदी में ज़िंदा ही बहा दिया था। महाराज शान्तनु की पत्नी  गंगा ने अपने सात बेटों को नदी में डुबो कर मार डाला था।
कलियुग में हम अनेक रिश्तों को बनते और बिगड़ते देखते हैं। आपने एक नौटंकी पढ़ी होगी अथवा देखी होगी, नौटंकी का नाम है--गरीब की दुनिया अथवा सूखी रोटी। समय खराब आ जाने पर एक भाई अपने बहन के घर जाता है। बहन उसको खाने के लिए बासी सूखी रोटी देती है जबकि वह अपने दास-दासियों को पकवान खिला रही थी। यहाँ तो अपने सुख के लिए लोग रिश्ता बनाते हैं, अपने सुख के लिए लोग रिश्ता निभाते हैं और अपने सुख के लिए लोग रिश्ता तोड़ देते हैं। 
रिश्ता तब तक चलता रहता है, जब तक
एक दूसरे को सुख मिलता है, जब सुख मिलना बन्द हुआ  तो रिश्ता खत्म। यहाँ इस दुनिया में न अपना कोई सगा है और न कोई पराया। अपना सगा केवल और केवल ईश्वर है, जो हम सब‌ का पिता है। उसका-हमारा रिश्ता सगा है, और अटूट है। वह सदा ही हमारा भला चाहता है। इसलिए आप ईश्वर की ओर मुड़िए और उस पर विश्वास कीजिए क्योंकि उसका और हमारा रिश्ता कभी न खत्म होने वाला है।

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